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खरीफ सीजन में किसानों को मांग अनुसार दिया जा रहा डीजल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन प्रश्नकाल के दौरान विधायक अटल श्रीवास्तव के द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने सदन को बताया कि वर्ष 2026-27 के खरीफ सीजन हेतु राज्य सरकार द्वारा 3 लाख मे.टन डी.ए.पी. की मांग आंकलित की गई, जिसके अनुरूप ही भारत सरकार द्वारा 3 लाख मे.टन डी.ए.पी. का आवंटन/लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दिनांक 30.06.2026 की स्थिति में 01.04.2026 की बचत सहित कुल 1 लाख, 49 हजार, 874 मे. टन की आपूर्ति/भण्डारण कर 91 हजार, 991 मे.टन डी.ए.पी. का वितरण किया जा चुका है। प्रति एकड़ डी.ए.पी. उर्वरक की आवश्यकता का आंकलन फसल एवं मिट्टी परीक्षण परिणाम के आधार पर निर्धारित किया जा सकता है। विगत वर्ष कृषक द्वारा उठाव किये गये डी.ए.पी. उर्वरक की 60 प्रतिशत् मात्रा एवं शेष मात्रा वैकल्पिक उर्वरकों जैसे-एन.पी.के., एस.एस.पी. एवं नैनो डी.ए.पी. के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।
श्रीवास्तव ने फिर पूछा कि क्या कृषि कार्यों एवं सिंचाई के लिये किसानों को डीजल की सुचारू उपलब्धता हो रही है? इस पर मंत्री नेताम ने बताया कि विभाग द्वारा कृषि कार्य हेतु डीजल की मांग का पृथक से आंकलन नहीं किया जाता है, अत: जिलेवार विवरण दिया जाना संभव नहीं है। खाद्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ सीजन हेतु कृषि कार्यों एवं सिंचाई के लिये किसानों को डीजल सुचारू रूप से उपलब्ध हो रही है। वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत आवश्यक नियमों एवं सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए किसानों को मांग अनुसार डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। वर्तमान में राज्य में डी.ए.पी. की आपूर्ति और भण्डारण का कार्य लगातार प्रगति पर है ताकि मांग के अनुसार इसकी कमी न होने पाए। डीएपी उर्वरक एवं डीजल की कमी से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने हेतु किसानों को मांग अनुसार डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है तथा राज्य सरकार द्वारा डी.ए.पी. के विकल्प के रूप में किसानों को एन.पी.के., एस.एस.पी. आदि वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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