छत्तीसगढ़ दौरे पर सीएजी ने डिजिटल वित्तीय प्रबंधन और डेटा आधारित लेखा परीक्षा पर दिया जोर

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) श्री के. संजय मूर्ति ने मंगलवार को रायपुर स्थित प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), छत्तीसगढ़ तथा महालेखाकार (लेखा परीक्षा), छत्तीसगढ़ कार्यालयों का दौरा कर उनके कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने, डिजिटल परिवर्तन को गति देने और डेटा आधारित लेखा परीक्षा के जरिए वित्तीय जवाबदेही को मजबूत करने पर विशेष बल दिया। दौरे के दौरान सीएजी ने दोनों कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अलग-अलग समीक्षा बैठकें कीं। इन बैठकों में प्रौद्योगिकी, डेटा विश्लेषण, क्षमता निर्माण और प्रभावी वित्तीय निगरानी के माध्यम से संस्थागत कार्यप्रणाली तथा सुशासन को और सुदृढ़ करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), छत्तीसगढ़ के कार्यों की समीक्षा करते हुए श्री मूर्ति ने कोषागार निरीक्षण और वित्तीय विश्लेषण में डेटा एनालिटिक्स के व्यापक उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने राजकोषीय संकेतकों, खनिज राजस्व, उपयोगिता प्रमाण-पत्रों तथा आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर-डीडीओ) के बैंक खातों में पड़ी अव्ययित राशि की विश्लेषणात्मक निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सेवा पुस्तिकाओं के शीघ्र डिजिटलीकरण, सेवा अभिलेखों को भविष्य पोर्टल से जोडऩे, सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) के डेटा प्रबंधन को सुदृढ़ करने तथा संभागीय लेखा संवर्ग के अधिकारियों के लिए संरचित प्रशिक्षण और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाने पर भी बल दिया।
सीएजी ने प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), छत्तीसगढ़ द्वारा प्रौद्योगिकी आधारित वित्तीय प्रशासन और विश्लेषणात्मक समीक्षा की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन पहलों से राज्य में पारदर्शिता, जवाबदेही, दक्षता और सुदृढ़ वित्तीय प्रशासन को और मजबूती मिलेगी।
महालेखाकार (लेखा परीक्षा), छत्तीसगढ़ के साथ हुई समीक्षा बैठक में श्री मूर्ति ने सोलहवें वित्त आयोग (2026-2031) की अवधि के अनुरूप लेखा परीक्षा रणनीतियों को पुनर्संरेखित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के लिए उपलब्ध कराई जा रही प्रदर्शन आधारित केंद्रीय अनुदान राशि वित्तीय जवाबदेही की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लेखा परीक्षा का विशेष फोकस राज्य की संस्थागत तैयारियों के आकलन पर रहेगा, क्योंकि इन अनुदानों का लाभ सार्वजनिक वित्तीय पारदर्शिता तथा नगर निकायों के लेखों के समयबद्ध अंकेक्षण और प्रकाशन पर निर्भर करता है।







