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छग की 886 प्राचीन पांडुलिपियों में से 453 को केंद्र सरकार ने किया सत्यापित, 433 हुए रिजेक्टेड

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रायपुर। ज्ञान भारतम् अभियान अंतर्गत छग की प्राचीन पांडुलिपियों एवं ताम्रपत्र का सत्यापन एवं संरक्षण का मामला विधानसभा में राघवेन्द्र कुमार सिंह ने उठाया। जिस पर पर्यमंत्री मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि मोबाइल एप के माध्यम से कुल 886 प्रविष्टियां पोर्टल पर दर्ज की गई जिनमें से 453 पांडुलिपियों को केंद्र सरकार ने सत्यापित किया जबकि 433 पांडुलिपियों को रिजेक्टेड कर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक राघवेन्द्र कुमार सिंह ने पर्यटन मंत्री से जानना चाहा कि भारत सरकार के ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य से गत माह की स्थिति में कुल कितनी प्रविष्टियां की गई? इनमें से कितनी प्रविष्टियां सत्यापित (वेरीफाइड) तथा कितनी प्रविष्टियां अस्वीकृत (रिजेक्टेड) हैं? मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि भारत सरकार के ज्ञानभारतम् अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य से गत माह की स्थिति में मोबाइल एप के माध्यम से कुल 886 प्रविष्टियां (124422 पांडुलिपियाँ) पोर्टल पर दर्ज की गई है। ज्ञानभारतम केंद्र नई दिल्ली द्वारा इनमें से 453 प्रविष्टियां (12040 पांडुलिपियाँ) सत्यापित (वेरीफाइड) तथा 433 प्रविष्टियां (112382 पांडुलिपियाँ) अस्वीकृत (रिजेक्टेड) हैं।
राघवेंद्र ने फिर पूछा कि मल्हार (जिला बिलासपुर/मस्तूरी क्षेत्र) से प्राप्त बालार्जुन की ताम्रपट्टिकाएं सत्यापित हैं अथवा अस्वीकृत ? संबंधित अभिलेख की वर्तमान स्थिति की जानकारी देवें ? इस पर पर्यटन मंत्री ने कहा कि मल्हार (जिला बिलासपुर/मस्तूरी क्षेत्र) से प्राप्त बालार्जुन की ताम्रपट्टिकाएं ज्ञानभारतम पोर्टल की सत्यापित सूची में प्रविष्टि क्रमांक 286 पर दर्ज हैं। सर्वेक्षित जानकारी के अनुसार संबंधित अभिलेख वर्तमान में मल्हार निवासी श्री संजीव पाण्डेय के आधिपत्य में है। राघवेंद्र ने पूछा कि इन ताम्रपट्टिकाओं की खोज कब हुई थी? इसकी लिपि और भाषा क्या है? मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि विभाग से 2005 में प्रकाशित ग्रन्थ उत्कीर्ण लेख में प्रकाशित सूचना अनुसार इन ताम्रपट्टिकाओं की खोज 1987 में हुई थी। इसकी लिपि पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी और भाषा संस्कृत है।

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