राजिम मेला मार्ग निर्माण पर विवाद, सेलेक्टेड सॉइल की जगह तालाब की मिट्टी लगाने का आरोप

धर्म नगरी राजिम में मेला स्थल को जोड़ने वाली 24 करोड़ रुपये की पक्की सड़क के निर्माण को लेकर गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि सड़क निर्माण में सेलेक्टेड सॉइल (चुनी हुई मिट्टी) के स्थान पर शीतला तालाब की मिट्टी का उपयोग किया गया, जबकि तालाब सौंदर्यीकरण के लिए पालिका ने सड़क ठेकेदार को मिट्टी उपलब्ध कराई थी। इस मामले में नगर पालिका और पीडब्ल्यूडी के बीच हुए समन्वय को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, शीतला तालाब सौंदर्यीकरण के लिए करीब 1 करोड़ रुपये और मेला स्थल को जोड़ने वाली सड़क के लिए 24 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। दोनों कार्यों के लिए अलग-अलग तकनीकी मापदंड तय हैं, लेकिन आरोप है कि तालाब की मिट्टी का उपयोग सड़क निर्माण में कर नियमों की अनदेखी की गई। नगर पालिका सीएमओ संतोष विश्वकर्मा का कहना है कि पालिका प्रतिनिधियों के निर्णय के अनुसार तालाब गहरीकरण के लिए मिट्टी उपलब्ध कराई गई, क्योंकि गहरीकरण के लिए अलग से सरकारी प्रावधान नहीं था। उन्होंने बताया कि तालाब में फाउंटेन और लाइट लगाने के लिए अधिक गहराई की जरूरत थी और इसके बदले सड़क ठेका कंपनी द्वारा 15 से 20 मीटर ऊंची दो पचरी का निर्माण कराया जाएगा। वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली सेलेक्टेड सॉइल की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, जिसमें सीबीआर वैल्यू, प्लास्टिसिटी इंडेक्स और मिट्टी की मजबूती जैसे मापदंड शामिल होते हैं। आरोप है कि तालाब की पुरानी गीली और दलदली मिट्टी इन मानकों पर खरी नहीं उतर सकती, जिसके कारण बारिश के बाद सड़क किनारे कटाव और गड्ढे दिखाई देने लगे हैं। हालांकि, लोक निर्माण विभाग के एसडीओ मनीष साहू ने कहा है कि तालाब की मिट्टी की जांच कराई गई है और वह सभी मानकों के अनुरूप पाई गई है। उन्होंने बताया कि अर्थवर्क का भुगतान प्रक्रिया में है। अब निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच तकनीकी जांच और वास्तविक स्थिति पर नजर बनी हुई है।







