खाद्य विभाग में डिजिटल सुधारों से पारदर्शिता बढ़ी, हर महीने 42 लाख की बचत

डॉ. मोहन यादव ने खाद्य विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि विभाग ने उचित मूल्य दुकानों का उन्नयन कर उन्हें “जन पोषण मार्ट” के रूप में विकसित किया है, जिससे पात्र हितग्राहियों को बेहतर सेवाएं मिल सकें। मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम के तहत अब लाभार्थियों को मोबाइल संदेश के माध्यम से राशन वितरण और उपलब्धता की जानकारी दी जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है। समीक्षा के दौरान यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के तहत परिवहन रूट ऑप्टिमाइजेशन से सरकार को हर महीने लगभग 42 लाख रुपये की बचत हो रही है, साथ ही वाहनों की जीपीएस आधारित निगरानी स्टेट लेवल कमांड कंट्रोल सेंटर से की जा रही है। इसके अलावा सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन द्वारा सभी स्तरों पर ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था लागू की गई है और गोदामों में भंडारण क्षति कम करने के लिए प्रशिक्षण व सुधार कार्य किए जा रहे हैं। उपार्जन, मिलिंग और परिवहन में उपयोग होने वाले वाहनों का ULIP सॉफ्टवेयर के माध्यम से सत्यापन भी सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे पूरी व्यवस्था और अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बन रही है







