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केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने पुष्टि की—2027 में भी छत्तीसगढ़ करेगा ट्राइबल गेम्स की मेजबानी

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रायपुर। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026के सफल आयोजन ने छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास दिया है। अब राज्य सरकार ने केंद्र से नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और स्पोर्ट्स साइंस सेंटर जैसी सुविधाएं स्थापित करने की मांग की है, ताकि खेलों का माहौल और मजबूत हो सके।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से राज्य में खेल सुविधाओं को बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में अपार प्रतिभा है, जो 2047 तक विकसित भारत के सपने को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है। बुधवार को उद्घाटन समारोह के दौरान राज्य सरकार की खेलों के प्रति प्रतिबद्धता साफ नजर आई। मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों ने कहा कि डबल इंजन सरकार खेलों में बड़ा बदलाव ला सकती है, खासकर बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में।
मुख्यमंत्री साय ने 100 करोड़ रुपये के खेलउत्कर्षमिशन और जनजातीय कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, मैं केंद्र सरकार से अनुरोध करता हूं कि छत्तीसगढ़ की प्रतिभा को पहचानें। हमारे खिलाडिय़ों को हर जरूरी सुविधा मिले। हम खेलों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और यह हमारे बजट में भी दिखता है।
उन्होंने बताया कि राज्य में बस्तर ओलंपिक और सरगुजाओलंपिक जैसे बड़े आयोजन किए गए, जिनमें भारी भागीदारी रही। उन्होंने कहा बस्तर ओलंपिक में 4 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि सरगुजा ओलंपिक में 3.5 लाख लोग जुड़े। इससे पता चलता है कि हमारे राज्य में खेल संस्कृति कितनी मजबूत है।
डिप्टी सीएम और खेल मंत्री अरुण साव ने केंद्र सरकार से कई अहम मांगें रखीं। उन्होंने रायपुर में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, बिलासपुर में स्पोर्ट्स साइंस सेंटर, अंबिकापुर में नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और दुर्ग व अंबिकापुर में एथलेटिक्स के लिए बेहतर सुविधाओं की मांग की। राज्य के मुख्य सचिव विकास शील ने भी छत्तीसगढ़ को नेशनल गेम्स की मेजबानी देने की मांग की।
भारतीय खेल प्राधिकरण पहले से ही राज्य में सक्रिय है। छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में 33 खेलो इंडिया सेंटर चल रहे हैं, जहां 990 खिलाडिय़ों को वेटलिफ्टिंग, फुटबॉल, तीरंदाजी, हॉकी, कुश्ती और कबड्डी में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राज्य में खेल विकास के लिए 20.17 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

सरकार की कई योजनाओं का असर भी यहां दिख रहा है। फिटइंडिया और महिलाओं के लिए अस्मितालीग ने राज्य में खास प्रभाव डाला है। खासकर बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खेलों के जरिए सकारात्मक बदलाव आया है। अस्मिता लीग के जरिए फुटबॉल और हॉकी में लड़कियों की भागीदारी बढ़ी है। अब तक 124 लीग आयोजित हो चुकी हैं, जिनमें करीब 14,000 लड़कियों ने हिस्सा लिया है। कांकेर, भिलाई, राजनांदगांव और रायपुर जैसे इलाकों में खेलों ने नई पहचान बनाई है। इसके अलावा फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल अभियान के तहत राज्य में 18,776 कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें 2 लाख से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ अब खेलों को सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का मजबूत माध्यम बना रहा है।

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