संयम की सीढ़ी में तप आत्मशुद्धि का सर्वोत्तम साधन : मुनिश्री संवेग रत्न सागर जी म.सा.

रायपुर। विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास-2026 के दौरान अब धर्म और ध्यान के साथ तप की साधना का भी शुभारंभ हो गया है। वर्षावास में 2 अगस्त से तप की पूर्णमाला प्रारंभ होगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक- श्राविका तप आराधना से जुड़ेंगे। धर्मसभा में मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. ने कहा कि संयम की सीढ़ी और मोक्ष की राह में तप आत्मशुद्धि का सर्वोत्तम साधन है। आत्मविशुद्धि की ओर बढ़ने वाला प्रत्येक कदम तप है। उन्होंने कहा कि तप केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मा को निर्मल बनाने का माध्यम है।
मुनिश्री ने कहा कि वर्षावास के अंतर्गत सूत्र बोहराने का श्रावक का धर्म है। आज जो श्रावक परिवार ने सूत्र बोहराया है, इस सूत्र का वाचन धर्मसभा में होगा। सूत्र बोहराने का लाभ जरूर एक श्रावक परिवार को मिला है लेकिन अब सभी के पास सूत्र के ज्ञान को आत्मसात करने का अवसर होगा। जिन शासन में ज्ञान से जुड़ने के लिए भाव चाहिए। भावनात्मक तरीके से जुड़कर जो वर्षावास में वाचन होगा उसे आत्मसात सभी करेंगे तो आत्मकल्याण होगा।
तप के क्रम में श्राविका मधु कोठारी ने 31 जुलाई से तेला तप का आरंभ किया। वहीं 2 अगस्त से श्री पंच परमेष्ठी श्रेणी तप प्रारंभ होगा, जो 19 सितंबर तक चलेगा। इस तप का पारणा 20 सितंबर को कराया जाएगा। इसके अलावा 7 अगस्त से श्री गिरनार नेमी तप भी शुरू होगा, जो 28 अगस्त तक चलेगा। वर्षावास के दौरान विभिन्न तप आराधनाओं के माध्यम से श्रावक-श्राविका आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक साधना की ओर अग्रसर होंगे।
गुरु भगवंत को बोहराया गया सूत्र,पांच ज्ञान की हुई पूजा
प्रचार प्रसार मंत्री चंद्रप्रकाश ललवानी और कल्प तरुण कोचर ने बताया कि शुक्रवार को धर्मसभा में सरलादेवी अमरचंद झाबक परिवार ने गुरु भगवंत को सूत्र बोहराया। वहीं पांच ज्ञान की पूजा लाभार्थी परिवारों द्वारा की गई। सभी लाभार्थी परिवारों ने धर्मसभा में गुरु भगवंत का आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्मसभा में परम पूज्य मुनि श्री शाश्वतरत्न सागर जी म.सा. के सांसारिक पिता व नमीउण तीर्थ के ट्रस्टियों का सम्मान चातुर्मास समिति की ओर से किया गया। रविवार को बच्चों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन दोपहर 2:30 बजे से 4 के बीच किया जाएगा।







