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गिफ्ट डीड से प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने से पहले जान लें नियम

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रायपुर। प्रॉपर्टी ट्रांसफर, गिफ्ट डीड, स्टांप ड्यूटी, इनकम टैक्स एवं जीएसटी से जुड़े प्रावधानों की जानकारी देते हुए टैक्स एक्सपर्ट सीए चेतन तारवानी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी किसी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करना चाहता है, तो यह कार्य रजिस्टर्ड डीड के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रॉपर्टी ट्रांसफर के मुख्यत: चार माध्यम होते हैं—सेल डीड, गिफ्ट डीड, हक त्याग विलेख तथा बंटवारा नाम। इन सभी माध्यमों में स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, इनकम टैक्स एवं जीएसटी के अलग-अलग प्रावधान लागू होते हैं, जिनकी जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई बार लोग अपनी संपत्ति किसी रिश्तेदार के नाम पर खरीद लेते हैं या पारिवारिक बंटवारा होने के बाद भी विधिवत डीड नहीं बनवाते, जिससे भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में समय रहते सही कानूनी प्रक्रिया अपनाकर कम खर्च में अपनी प्रॉपर्टी को व्यवस्थित किया जा सकता है।
सीए चेतन तारवानी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति अपने रिश्तेदार के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को गिफ्ट डीड के माध्यम से प्रॉपर्टी ट्रांसफर करता है, तो उसे सेल डीड के समान स्टांप ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क देना होता है। ऐसी स्थिति में लगभग छह प्रतिशत स्टांप ड्यूटी तथा चार प्रतिशत रजिस्ट्रेशन फीस लागू होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि महिला को भी गिफ्ट दिया जा रहा हो, तब भी पूर्ण स्टांप ड्यूटी देय होती है। वहीं यदि प्रॉपर्टी किसी रिश्तेदार को गिफ्ट डीड के माध्यम से दी जाती है, तो स्टांप ड्यूटी मात्र 1.5 प्रतिशत तथा रजिस्ट्रेशन फीस केवल 500 रुपये देनी होती है।
उन्होंने बताया कि स्टांप एक्ट के अंतर्गत रिश्तेदारों की परिभाषा में पिता, माता, पति-पत्नी, पुत्र, पुत्री, पोता-पोती, नाती-नातिन, सगा भाई एवं सगी बहन शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन या संपूर्ण बिल्डिंग किसी को गिफ्ट करता है, तो उस पर जीएसटी लागू नहीं होता। इनकम टैक्स के प्रावधानों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि गिफ्ट देने वाले व्यक्ति पर कोई टैक्स नहीं लगता, लेकिन यदि गिफ्ट प्राप्त करने वाला व्यक्ति रिश्तेदार नहीं है और प्रॉपर्टी का मूल्य 50 हजार रुपये से अधिक है, तो वह राशि प्राप्तकर्ता की आय में जोड़ दी जाती है और यदि रिश्तेदार है इनकम टैक्स भी नहीं लगता।
सीए चेतन तारवानी ने आगे बताया कि इनकम टैक्स अधिनियम में रिश्तेदारों की परिभाषा और अधिक व्यापक है। इसमें जीजा, भाभी, पति या पत्नी के भाई-बहन, उनके जीवनसाथी, माता-पिता के भाई-बहन एवं उनके जीवनसाथी सहित स्वयं एवं अपने जीवनसाथी की तीन पीढिय़ों ऊपर और नीचे तक के रिश्तेदार शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि गिफ्ट डीड प्रॉपर्टी ट्रांसफर का आसान माध्यम है, जिसमें स्टांप ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क अपेक्षाकृत कम होते हैं तथा इनकम टैक्स प्लानिंग भी की जा सकती है। हालांकि उन्होंने लोगों को सावधान करते हुए कहा कि एक बार प्रॉपर्टी गिफ्ट कर देने के बाद उसे वापस लेना संभव नहीं होता। इसलिए यदि माता-पिता अपने बच्चों को संपत्ति देना चाहते हैं, तो कई मामलों में वसीयतनामा अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है, जिससे जीवनकाल तक संपत्ति पर उनका अधिकार सुरक्षित रहता है। वहीं यदि भाइयों के बीच पहले से बंटवारा हो चुका है या किसी अन्य व्यक्ति को संपत्ति हस्तांतरित करनी है, तो संबंधित व्यक्ति के नाम गिफ्ट डीड कराना बेहतर विकल्प हो सकता है।

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