शुभ मुहूर्त का जीवन में बड़ा महत्व: रामनाथ रामचंद्र

रायपुर। सनातन संस्कृति में शुभ मुहूर्त का बड़ा महत्व है। आज हम आधुनिकता में इतने घिर चुके हैं कि हम अपनी सुविधा के अनुसार मुहूर्त तय करने की कोशिश करते हैं। फिर बात शादी की हो, या बच्चे के जन्म की। आजकल बच्चे के जन्म का दिन व समय हम स्वयं तय कर रहे हैं। वहीं शादी का मुहूर्त भी हम यह देखकर तय करते है कि बच्चों के पेपर तो नहीं, कौन सा रिश्तेदार आ पाएगा कौन नहीं आ पाएगा। नतीजा यह कि आजकल बड़े पैमाने की शादियों में शुरुआती दिनों से ही समस्याएं आने लगतीं हैं। शादी तो हो जाती है लेकिन बच्चे नहीं, परिवार नहीं। यही वजह है कि सनातन संस्कृति को मानने वालों को शुभ मूहूर्त पर ही वैदिक कार्य करने चाहिए। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल के शिवाजी महाराज सभागृह में चल रही वाल्मिकी रामायण कथा के दूसरे दिन पुणे से पहुंचे कथावाचक रामनाथ रामचंद्र अय्यर ने कहीं।
आचार्य अय्यर ने कहा कि पूजा- पाठ में मंत्रोच्चार व श्लोक का बड़ा महत्व है। इससे कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। मंत्रोच्चार कभी भी लय में या संगीतबद्ध तरीके से गाना या बोलना नहीं चाहिए। यह पाप है। मंत्रोच्चार चाहे वो गायत्री मंत्र हो, शनि मंत्र या कोई भी… सभी में यही बात लागू होती है। राम कथा के प्रसंग पर कथावाचक ने कहा कि सज्जन व्यक्ति को दूसरों के आनंद से आनंद होता है और दुर्जन को दूसरों से आनंद से दु:ख। हमें दूसरों के सुख और सफलता से खुश होना आना चाहिए।
आचार्य रामनाथ रामचंद्र ने कहा कि मंगल कार्य के लिए जब तक आपके घर में आकर आमंत्रण न मिले, तो नहीं जाना चाहिए। इसी तरह अमंगल कार्य के लिए यदि कोई घर में आकर आमंत्रित करे, तो भी कभी नहीं जाना चाहिए। अमंगल कार्य यानी मांसाहार, नशाखोरी, अपराध करने अथवा जुआ खेलने जैसी वृत्ति होती है। उन्होंने कहा कि इसी तरह सत्संग अथवा प्रवचन के लिए बिना बुलाए भी जाना चाहिए क्योंकि ऐसे अवसर जीवन में कम ही मिलते हैं और इसका लाभ लेकर पुण्?य अर्जित करना चाहिए। कथा के बाद कथावाचक अय्यर के साथ आज के यजमान प्रशांत देशपांडे ने सपत्नीक महाआरती की। तत्पश्चात महाप्रसाद का वितरण किया गया।







