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नारायणी बहुभाषी संग्रहालय लोकार्पित

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रायपुर। नारायणी साहित्यिक संस्थान द्वारा नारायणी बहुभाषी संग्रहालय का लोकार्पण गत रविवार को किया गया। संग्रहालय के राजेंद्र और डॉ. मृणालिका ओझा ने बताया कि इस विशिष्ट संग्रहालय में न केवल छत्तीसगढ़ की छत्तीसगढ़ी, हल्बी, गोंडी, भथरी, सरगुजिहा, दोरली, धुर्वी आदि बोलियों की पुस्तकें रखी गई है अपितु छत्तीसगढ़ी, हल्बी, गोंडी भाषा के कैलेंडर एवं छत्तीसगढ़ी तथा सरगुजिहा भाषा की पत्रिकाएं भी प्रदर्शित की गई हैं।
इस संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त भारत के अन्य राज्यों महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, सिक्किम, मिज़ोरम, अरूणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, असम, मणिपुर, नागालैंड, लद्दाख, उत्तराखंड, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, बिहार, राजस्थान, गुजरात, आंध्रप्रदेश, गोवा सहित नेपाल, अमेरिका, रुस, जर्मनी, फ्रांस, चेकोस्लोवाकिया आदि की 150 से ज्यादा भाषा / बोलियों की पुस्तकें प्रदर्शित की गई है। इसके अलावा उपरोक्त देश एवं विदेश की करीब 70-80 भाषाओं के लगभग 200 कैलेंडर भी इस संग्रहालय की एक विशेषता है। हिन्दी के अतिरिक्त करीब 25 भाषा – बोलियों की 200 से अधिक पत्रिकाएं भी इस संग्रहालय को और महत्वपूर्ण बनाती है। छत्तीसगढ़ एवं हरियाणा के बंद हो चुके समाचार पत्र छत्तीसगढ़ी सेवक एवं लणिहार भी यहां देखें जा सकतें हैं।
लोकार्पण के अवसर पर डा. सुशील त्रिवेदी, अजय काले, गिरीश पंकज, डॉ. सुरेन्द्र रावल, डॉ. सुधीर शर्मा, शशांक शर्मा, डॉ. चित्तरंजन कर, डॉ. माणिक विश्वकर्मा, रामेश्वर शर्मा, मुकेश गुप्ता, रवि प्रताप सिंह , कुमार जगदलवी, सुनील पांडेय, जीवेश प्रभाकर, सुभाष शर्मा, आनंद हर्षुल, अरविंद ओझा, शिवाकांत त्रिपाठी, राजेश जैन राही, माधुरी कर, उमेश कुमार सोनी, अनुकृति, किशोर, ह्रषीक, रोशनी, चिन्मय झा, सुयश ठाकुर, विजय झा, प्रदीप मिश्रा, अरुण ठाकुर, नवीन निगम, आदि लोग उपस्थित हुए थे।

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