बिना मान्यता वाले विद्यालयों का मुद्दा हाईकोर्ट में पुनः उठा

हस्तक्षेपकर्ता विकास तिवारी ने धारा 18 RTE Act के उल्लंघन की ओर कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में लंबित WPPIL No. 22/2016 की सुनवाई सोमवार 20 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रवीन्द्र अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता विकास तिवारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने न्यायालय को अवगत कराया कि शैक्षणिक सत्र 2026–27 में RTE के अंतर्गत रिक्त सीटों को भरने के लिए विशेष प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। जिला शिक्षा अधिकारियों को आवेदन आमंत्रित कर लॉटरी अथवा काउंसलिंग के माध्यम से प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण करने तथा निर्धारित समय सीमा तक RTE पोर्टल में विद्यार्थियों की प्रविष्टि करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता ने न्यायालय का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि कृष्णा किड्स एकेडमी सहित राज्य के अनेक बिना पंजीयन एवं बिना मान्यता वाले विद्यालय अभी भी संचालित हो रहे हैं, जबकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 18 ऐसे विद्यालयों के संचालन पर रोक लगाती है। इस संबंध में उन्होंने अपने आवेदन के साथ संलग्न प्रमुख लोकायुक्त के आदेश का भी उल्लेख किया।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी क्रमांक 51 की ओर से यह कहा गया कि हस्तक्षेपकर्ता द्वारा दायर rejoinder की प्रति उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। इस पर न्यायालय ने निर्देश दिया कि हस्तक्षेपकर्ता rejoinder की प्रति उपलब्ध कराएं तथा अन्य संबद्ध मामलों में भी पक्षकार आपस में अपने-अपने अभिलेखों का आदान-प्रदान करें। कोर्ट ने प्रकरण की अगली सुनवाई 7 सितम्बर 26 निर्धारित की है।
विकास तिवारी ने कहा कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा तथा कानून के समान पालन के लिए बिना मान्यता वाले विद्यालयों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के समक्ष यह मुद्दा रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुका है और आगे भी वे उपलब्ध तथ्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगे।







