Chhattisgarh

संत विजय कौशलजी महाराज ने वृंदावन में आने वाले सभी तीर्थ यात्रियों को भगवान कृष्ण का रिश्तेदार कहा

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संत विजय कौशलजी महाराज वृंदावन द्वारा वृंदावन में आने वाले सभी तीर्थ यात्रियों को भगवान कृष्ण का रिश्तेदार बताया गया है और हर रिश्तेदार का आथित्य करना हिंदू संस्कृति के संस्कार मे है। अतः वृंदावन में आने वाले अतिथियों के भोजन व्यवस्था हेतु माननीय गुरुजी विजय कौशल जी महाराज के द्वारा “श्री जी की रसोई” प्रारंभ की गई है जिसमें वृंदावन में आने वाले सभी अतिथियों को सम्मान पूर्वक बैठाकर भोजन परोसा जाता है। परोसगारी भी मंगलमय परिवार के सदस्य करते हैं।

वर्तमान में लगभग 3000 तीर्थयात्री दोपहर में और 3000 रात्रि में भोजन प्राप्त कर रहे हैं। श्रीजी की रसोई हेतु भवन व्यवस्था उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा बहुत सुंदर वातानुकूलित भवन बनाकर दिया गया है।
प्रारंभ में परमपूज्य गुरुजी श्री विजय कौशल जी महाराज के द्वारा मंगलमय परिवार के यजमान बनाकर सहयोग राशि ₹11000 से प्रारंभ की गयी।
वर्तमान में इसी राशि से “श्री जी की रसोई” व्यय संचालित किया जा रहा है। इस परिपाटी को विस्तृत करने हेतु आपश्री से भी सादर अनुरोध है कि मंगलमय परिवार के यजमान बनकर “श्री जी की रसोई” में सहयोग करें।

तीर्थ यात्रियों की भोजन व्यवस्था का यजमान बनना धर्मानुसार बहुत उचित कार्य है मेरा आपसे पुनः अनुरोध है कि इस पुण्य कार्य में सहभागी बान श्री जी की रसोई में यजमान बनने का आनंद प्राप्त करें।

यजमान सहयोग में आयकर विभाग द्वारा दिए गए 80G की छूट भी प्राप्त होगी
इस हेतू आवेदन प्रपत्र मेरे पास उपलब्ध है।

श्रीजी की रसोई का संचालन वृंदावन में पूजनीय विजय कौशल जी महाराज द्वारा जन्माष्टमी 2022 से किया जा रहा है इसमें वृंदावन में आए कृष्ण भक्तों को निशुल्क भोजन हाल के अंदर बैठल कर करवाया जा रहा है।

महाराज जी की इस परिकल्पना को साकार करने हेतु उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी द्वारा 9 करोड रुपए की लागत से एयर कंडीशन हॉल का निर्माण करवा कर दिया गया है।

इस रसोई के संचालन हेतु महाराज जी द्वारा मंगलमय परिवार की परिकल्पना की गई है। मंगलमय परिवार में सदस्य बनने हेतु 11000 रुपए की राशि आजीवन सदस्यता हेतु निर्धारित की गई है इस राशि का उपयोग श्री जी की रसोई के संचालन हेतु होता है , मंगलमय परिवार के सदस्यों से महाराज जी की अपेक्षा है कि वह वृंदावन आए और श्रीजी की रसोई में भोजन करने वाले भक्तों को भोजन की परोसगरी करें सदस्यों हेतु वहां रहने की व्यवस्था एवं भोजन की व्यवस्था निशुल्क है।

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