सरकार और प्रशासन उद्योगपतियों के साथ, भू अधिकार नियम और मुआवजा कानूनों का खुला उल्लंघन – वर्मा

रायपुर। भाजपा सरकार पर कॉरपोरेट परस्ती का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि निजी उद्योगों द्वारा पाइपलाइन बिछाने किसानों के खेतों में जबरिया खुदाई की जा रही है। न सहमति, न मुआवजा, न नोटिस, सत्ता के संरक्षण में मनमानी कर रहे हैं, बिना इजाजत निजी जमीन और खेत खोद कर बर्बाद किए जा रहे हैं। भविष्य में किसान अपनी उस जमीन पर न कोई निर्माण कर पाएंगे न ही ट्यूबवेल कर पाएंगे, किसानों से भूमि का अधिकार छीन रही हैं सरकार।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता वर्मा ने कहा है कि मोदी के मित्र अडानी के रायखेड़ा पॉवर प्लांट और बलौदा बाजार के कारखानों में औद्योगिक उपयोग हेतु जल आपूर्ति के लिए रायपुर जिले के आरंग ब्लॉक से महानदी का पानी लाने समोदा से घोरभट्टी, चकवे, चोरभट्टी, कोरासी, भैंसा, भेजरीडीह सहित क्षेत्र के दर्जनों गांव में किसानों की खेत/जमीन जबरिया खोद कर पाईप लाईन बिछा रहे हैं। एक और नया पाइपलाइन महानदी से आरंग के चिखली घाट से भैसा तक लाकर इसी लाइन में जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। सरकार और प्रशासन उद्योगपतियों के साथ खड़ी है, सत्ता के संरक्षण में तमाम प्रावधान और नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। पहले जो समोदा एनीकट से रायखेड़ा तक पाइपलाइन बिछाया गया था, वह रानीसागर रोड के किनारे किनारे खोद कर बिछाया गया था, जिससे किसान अधिक प्रभावित नहीं थे, लेकिन वर्तमान में जो दो-दो, तीन-तीन नई पाइपलाइन महानदी से रायखेड़ा और बलौदा बाजार जिले के उद्योगों में भेजा जा रहा है, उसमें तो शत प्रतिशत किसानों के निजी जमीन और खेतों को बिना सहमति के जबरिया खोदकर बर्बाद किया जा रहा है।
वर्मा ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से पूरे प्रदेश में लगभग यही हालत है। दुर्ग जिले के धमधा ब्लाक के 21 गांव गेल इंडिया के गैस पाइपलाइन से प्रभावित है, जांजगीर चांपा के 19 गांव के किसान इसी तरह जबरन उनका खेत खोदे जाने से परेशान है, बेमेतरा बिरला में शारदा आयरन प्लांट द्वारा नदी का पानी लेने के लिए बिना अनुमति पाइपलाइन विस्तार किया गया। इन क्षेत्रों में 20-20 मीटर तक की जमीन पर किसान दिगर उपयोग भी नहीं कर पायेगा। भूमिगत पाइपलाइन (भूमि उपयोग का अधिकार) अधिनियम 2004 और “भूमि अधिग्रहण कानून“ के प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। पाइप लाइन विवाद में किसान अपनी उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं है, जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी काम रुकवाना तो दूर किसानों की शिकायत सुनने तक तैयार नहीं हैं। किसी किसी किसान को मुआवजे के तौर पर नगण्य राशि दी भी गई है लेकिन अधिकांश मुआवजे से भी वंचित हैं। किसानों के उपजाऊ जमीन का बड़ा हिस्सा उपयोग के लिए स्थाई रूप से अयोग्य हो जाता है, जिस भूमि के नीचे पाइपलाइन है वहां भवन, कुआं, जलाशय या पेड़ नहीं लगा सकता फिर उचित मुआवजा क्यों नहीं मिलना चाहिए?







