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भाजपा नेता के साथ बदसलूकी के मामले में सीईओ रूपेश पाण्डेय निलंबित 

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दुर्ग। सुशासन तिहार के तहत ग्राम थनौद में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में भाजपा नेता के साथ बदसलूकी के मामले में जनपद पंचायत दुर्ग के सीईओ रूपेश कुमार पाण्डेय को निलंबित कर दिया गया है। उनके स्थान पर प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी, जिला पंचायत दुर्ग महेन्द्र कुमार जांगड़े को अपने वर्तमान दायित्वों के साथ मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत दुर्ग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। दुर्ग संभागायुक्त द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। यह घटना विधायक ललित चंद्राकर की मौजूदगी में हुई थी और उन्होंने जनपद सीईओ की शिकायत की थी। जिसके बाद यह कार्यवाही की गई।
जारी आदेश के मुताबिक 30 मई को श्री रूपेश कुमार पाण्डेय, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, दुर्ग के द्वारा कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही एवं अशिष्ट व्यवहार किए जाने के कारण निलंबन की कार्यवाही प्रस्तावित की गई है। कलेक्टर जिला दुर्ग से प्राप्त प्रस्ताव एवं शासन द्वारा आयोजित सुशासन तिहार के तहत् ग्राम थनौद में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में श्री रूपेश कुमार पाण्डेय, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत दुर्ग द्वारा आम जनता से अशिष्ट व्यवहार संबंधी वीडियो क्लिप के अवलोकन से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि श्री रूपेश कुमार पाण्डेय, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, दुर्ग के द्वारा शासन द्वारा आयोजित सुशासन विहार एवं शिविर में कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही एवं आम जनता से अशिष्टत्तापूर्वक व्यवहार किया गया है, जो कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आवरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत होने के कारण इस कार्यालय के पत्र क्रमांक/1578/आयुक्त/स्थापना/2026 दिनांक 30 मई, 2026 द्वारा श्री रूपेश कुमार पाण्डेय, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, दुर्ग को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसके सदर्भ में श्री पाण्डेय के द्वारा प्रस्तुत जवाब समाधानकारक नहीं है।
छ.ग. सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के तहत प्रत्येक शासकीय सेवक सदैव ही पूर्ण रूप से सन्निष्ठ रहेगा, कर्तव्यपरायण रहेगा और ऐसा कोई भी कार्य नहीं करेगा जो कि शासकीय सेवक के लिए अशोभनीय हो एवं नियम 3-क के खण्ड (क) के अनुसार कोई भी शासकीय सेवक अपने पदीय कृत्यों के पालन में अशिष्टता से कार्य नही करेगा, उपबंधित है।
व्याख्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में शासन तन्त्र आम नागरिकों के प्रति उत्तरदायी होता है, फलस्वरूप प्रत्येक लोक सेवक द्वारा, आम नागरिको से शिष्ट व्यवहार को, आचरण संहिता का एक महत्वपूर्ण घटक माना गया है। छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय रायपुर की अधिसूचना क्रमांक एफ 3-1/2007/1-3 दिनांक 04 अगस्त, 2008 के द्वारा समस्त संभागीय आयुक्तों को उनके अपने-अपने संभागो में पदस्थ राज्य शासन के सभी विभागों के द्वितीय श्रेणी के (न्यायिक सेवा तथा पुलिस विभाग के अधिकारियों से भिन्न) शासकीय सेवकों के संबंध में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-10 के खण्ड (एक) से (चार) में विनिर्दिष्ट शास्तियां अधिरोपित करने हेतु अधिकार प्रत्यायोजित किए गए है।

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