बिहान योजना बनी रीता मिंज की नई उड़ान, मिंज बस ट्रांसपोर्ट से आत्मनिर्भरता की लिखी मिसाल

एमसीबी। कहते हैं कि यदि मेहनत, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो हर सपना साकार हो सकता है। मनेंद्रगढ़ विकासखंड के ग्राम चनवारीडांड की रहने वाली रीता मिंज ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। कभी सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी से जूझने वाली रीता मिंज आज बिहान (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) की मदद से न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने गांव और आसपास की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई हैं। आज उनका ‘ मिंज बस ट्रांसपोर्ट ‘ व्यवसाय सफलता की नई मिसाल बन चुका है।
रीता मिंज वसुंधरा महिला स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। यह समूह 12 जुलाई 2017 को गठित हुआ था। समूह में कुल 10 महिलाएं शामिल हैं, जिन्होंने एक-दूसरे का सहयोग करते हुए आजीविका के नए अवसरों की तलाश की। बिहान मिशन के माध्यम से समूह को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन मिला, जिसने इन महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव रखी।
शुरुआत में रीता मिंज एक सामान्य ग्रामीण महिला की तरह परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी और आय के सीमित साधन होने के कारण भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी। ऐसे समय में उन्होंने बिहान योजना से जुड़कर अपने जीवन में बदलाव लाने का संकल्प लिया। समूह की बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और वित्तीय साक्षरता ने उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया कि यदि सही दिशा मिले तो वे स्वयं का व्यवसाय भी स्थापित कर सकती हैं।
बिहान योजना के अंतर्गत उनके समूह को पहले 15 हजार रुपये की रिवॉल्विंग फंड (RF) सहायता प्राप्त हुई। इसके बाद 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि (CIF) तथा 3 लाख रुपये का बैंक ऋण (Bank Linkage) उपलब्ध कराया गया। इन सभी वित्तीय सहयोगों के साथ रीता मिंज ने स्वयं भी निवेश कर अपने व्यवसाय को विस्तार दिया। कुल मिलाकर लगभग 1 लाख 40 हजार रुपये की प्रारंभिक निवेश व्यवस्था के आधार पर उन्होंने ‘ मिंज बस ट्रांसपोर्ट ‘ की शुरुआत की, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
आज रीता मिंज का बस परिवहन व्यवसाय सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इस व्यवसाय से उन्हें प्रतिमाह लगभग 80 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं। अब उन्हें दैनिक आवश्यकताओं या व्यवसाय के लिए किसी साहूकार अथवा निजी ऋणदाता पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
रीता मिंज की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है। उन्हें देखकर अनेक महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ रही हैं और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वे समय-समय पर समूह की बैठकों में अन्य महिलाओं को व्यवसाय, बचत और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित भी करती हैं।
बिहान मिशन के अधिकारियों और समूह के सहयोग से रीता मिंज ने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और शासन की योजनाओं का सही उपयोग किया जाए तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी बड़े सपनों को साकार कर सकती हैं। आज उनका परिवहन व्यवसाय केवल आय का साधन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुका है।
रीता मिंज का मानना है कि बिहान योजना ने केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी दिया। आज मैं सम्मानपूर्वक अपना व्यवसाय चला रही हूं और अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हूं।
आज वसुंधरा महिला स्व-सहायता समूह की यह सफलता यह संदेश देती है कि शासन की योजनाओं का सही लाभ उठाकर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं, अपने परिवार की आय बढ़ा सकती हैं और समाज में नई पहचान स्थापित कर सकती हैं। रीता मिंज की यह प्रेरक यात्रा न केवल मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले, बल्कि पूरे प्रदेश की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और सफलता की एक जीवंत मिसाल है।







