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स्कूलों में 10 मंत्रों के जाप के अनिवार्य का नियम बच्चों पर जबरदस्ती थोपा गया – मनीष कुंजाम

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सुकमा। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सुबह से लेकर छुट्टी तक छात्रों के लिए 10 तरह के मंत्रों के जाप को अनिवार्य किए जाने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले का बस्तरिया राज मोर्चा के मनीष कुंजाम ने विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि यह बच्चों पर जबरदस्ती थोपा गया है। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आरएसएस के इशारों पर चल रही है। गुरुवार को प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने कहा कि यह फैसला सिर्फ किसी एक जिले का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने इसे बच्चों की पढ़ाई पर असर डालने वाला और जबरदस्ती थोपा गया नियम बताया। कुंजाम ने कहा कि सुबह स्कूल शुरू होते ही बच्चों से छह मंत्रों का पाठ कराया जा रहा है। पूर्व विधायक ने कहा कि पूरे दिन अलग-अलग समय पर कुल 10 मंत्रों का जाप कराया जा रहा है। इसमें राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के अलावा दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, महापुरुषों की जीवनी का वाचन, मध्यान्ह भोजन के समय भोजन मंत्र और छुट्टी के समय गायत्री मंत्र और शांति मंत्र शामिल हैं।
मनीष कुंजाम ने कहा कि इस नए शेड्यूल को लेकर स्कूलों के शिक्षक भी काफी परेशान हैं। शिक्षकों में असमंजस की स्थिति है कि वे पूरा समय इन गतिविधियों में ही लगाएंगे या फिर नियमित रूप से बच्चों को पढ़ाई भी कराएंगे। मनीष कुंजाम ने आरोप लगाया कि यह आदेश देश के संविधान के प्रावधानों और उसकी मूल भावना के पूरी तरह खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह कदम संविधान की धर्मनिरपेक्षता की भावना को चोट पहुंचाता है। स्कूलों में इसे अनिवार्य करना हमारी आदिवासी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक तौर-तरीकों के बिल्कुल विपरीत है। यह हमारी संस्कृति को खत्म करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह सरकार पूरी तरह से आरएसएस के शेड्यूल और उसके इशारों पर काम कर रही है। देश को एक गंभीर मुसीबत की ओर धकेला जा रहा है। अब यह बात आम जनता के बीच भी स्पष्ट हो चुकी है कि भाजपा और आरएसएस की सरकारें देश के संविधान को बदलकर मनुस्मृति पर आधारित कानून और व्यवस्था लागू करना चाहती हैं।

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