बरकतउल्ला विश्वविद्यालय नाम परिवर्तन प्रस्ताव ने बढ़ाया विवाद

राजधानी भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर “वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने के प्रस्ताव के बाद एक नई बहस छिड़ गई है। प्रस्ताव में तर्क दिया गया है कि राजा भोज का क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है, जबकि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली का संबंध मुख्य रूप से भोपाल निवासी होने तक सीमित बताया गया है। इस प्रस्ताव में राजा भोज के योगदानों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उन्होंने कई ग्रंथों की रचना की, धार को ज्ञान का केंद्र बनाया तथा भोजताल और भोजपुर जैसे ऐतिहासिक स्थलों की स्थापना से उनका गहरा संबंध रहा है। वहीं दूसरी ओर मौलाना बरकतउल्ला भोपाली को गदर आंदोलन से जुड़े क्रांतिकारी के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने विदेश में रहकर स्वतंत्रता आंदोलन को वैश्विक समर्थन दिलाया था। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1988 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कार्यकाल में भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय रखा गया था। अब नाम परिवर्तन के इस नए प्रस्ताव के बाद राजा भोज और बरकतउल्ला के योगदान को लेकर एक बार फिर तीखी बहस शुरू हो गई है।







