समझौते के बाद भी कम दर पर जमीन अधिग्रहण का कंपनियों पर लगा आरोप

सिंगरौली जिला, जिसे देश में ऊर्जाधानी के नाम से जाना जाता है, प्रचुर कोयला भंडार के कारण कई कोयला खदानों और ताप विद्युत गृहों का प्रमुख केंद्र है। यहां लगातार बढ़ते खनन कार्यों के चलते पिछले वर्षों में कई कोल खदानों के लिए भूमि अधिग्रहण किया गया है और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। सरकारी कंपनियां जहां कोयला खदानों के लिए भूमि का अधिग्रहण Coal Bearing Areas (Acquisition and Development) Act, 1957 के तहत करती हैं, वहीं निजी कंपनियों के लिए कोल ब्लॉक का अधिग्रहण Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 के अंतर्गत किया जाता है। इसी क्रम में बंधा कोल ब्लॉक, जिसे Aditya Birla Group की सहायक कंपनी Essel Mining & Industries Limited (ईएमआईएल) के लिए अर्जित किया जा रहा है, वहां कंपनी द्वारा प्रभावितों से 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से भूमि मूल्य देने का लिखित अनुबंध किया गया था, जबकि जमीन का प्रस्तावित मूल्य 20 लाख रुपये प्रति एकड़ बताया गया था। आरोप है कि कंपनी ने इस अनुबंध की जानकारी भूमि अर्जन कर रही संस्था और सरकार को नहीं दी, जिसके कारण प्रभावित पांच गांवों की जमीन का अवार्ड मात्र 10 से 12 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से पारित कर दिया गया। अब आरोप यह भी है कि अपनी गलती सुधारने के बजाय संबंधित प्रशासन कंपनी को अंतर राशि वसूलने के लिए नोटिस जारी करने का निर्देश दे रहा है और कंपनी अनुबंध की दर को सोलेसियम व ब्याज सहित बताकर प्रभावितों को अंतर राशि भुगतान की नोटिस भेज रही है। प्रभावितों का कहना है कि अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत पारित किए गए अवार्ड को संशोधित कर दोबारा जारी किया जाना चाहिए था। वहीं इस परियोजना के प्रतिकर भुगतान को लेकर स्थानीय राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक स्तर पर खींचतान की स्थिति भी सामने आ रही है, जिसमें कलेक्टर को मध्यस्थ बनाकर मामले को साधने की कोशिश की जा







