वनवासी कल्याण आश्रम ने पद्मश्री सम्मान से विभूषित बुधरी ताती और गोडबोले दंपति को किया सम्मानित

रायपुर। छत्तीसगढ़ से जनजातीय सेवा और आदिवासी विकास के क्षेत्र में काम करते हुए अपना जीवन समर्पित करने वाली पद्मश्री सम्मान प्राप्त तीन विभूतियों का आज वनवासी कल्याण आश्रम ने रायपुर में सम्मान किया। वनवासी विकास समिति के तत्वावधान में शनिवार सायं रोहिणीपुरम स्थित शबरी कन्या आश्रम परिसर में इस सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
वर्ष 2026 के लिए देश भर से चुने गए पद्मश्री सम्मान प्राप्त नागरिकों में छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की तीन विभूतियाँ भी शामिल हैं, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज के उत्थान, शिक्षा, स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित किया है।
पद्मश्री सुश्री बुधरी ताती वनवासी कल्याण आश्रम की अल्पायु से ही समर्पित कार्यकर्ता रहीं है। इन्होंने जनजातीय महिलाओं के सशक्तीकरण और समाज सेवा में अपना अमूल्य योगदान दिया है। पद्मश्री डॉ. राम गोडबोले एवं पद्मश्री श्रीमती सुनीता गोडबोले ने महाराष्ट्र से निकलकर दशकों तक बस्तर के सुदूर वनांचलों में रहकर जनजातीय समाज के स्वास्थ्य, शिक्षा और सर्वांगीण विकास के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। सम्मान समारोह के दौरान तीनों पद्मश्री विभूतियों के कार्यों की विस्तार से चर्चा की गई, जिससे वहाँ उपस्थित युवाओं, समाजसेवियों और नागरिकों में एक नई ऊर्जा तथा प्रेरणा का संचार हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में वनवासी कल्याण आश्रम की केंद्रीय प्रशिक्षण समिति की सदस्या श्रीमती माधवी जोशी ने अपना वक्तव्य दिया। श्रीमती जोशी ने पद्मश्री सम्मान पाने वाले तीनों विभूतियों के कामों को अन्य लोगों के लिए अनुकरणीय और प्रेरणा बताया। उन्होंने बताया कि कैसे बस्तर जैसे सुदूर अंचल में इन तीनों ने संघर्ष करते हुए लगातार सेवा कार्य किया है और नक्सलवाद की चुनौतियों के बावजूद कभी हार नहीं मानी। कार्यक्रम के सफल आयोजन के पश्चात, वनवासी विकास समिति के अध्यक्ष उमेश कच्छप ने उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों, कार्यकर्ताओं और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। अपने धन्यवाद ज्ञापन में उमेश कच्छप ने कहा कि पद्मश्री से सम्मानित महान विभूतियों का सम्मान करना हमारे लिए एक परम सौभाग्य का विषय है और उनके दिखाए गए सेवा-मार्ग पर चलने का एक संकल्प भी है। आज का दिन हमारे लिए गौरव का दिन है। ऐसा गौरव का क्षण एक दिन के परिश्रम से नहीं मिलता। बस्तर के सुदूर अंचल की उन विषम परिस्थितियों और संघर्षमय जीवन में इन तीनों लोगों ने कठिन से कठिन कार्मों को अंजाम दिया है।







