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खरीदी केंद्रों से समय पर धान उठाने की योजना हुई विफल, 10 मई तक का मिला नया अल्टीमेटम

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जगदलपुर। बस्तर जिले के धान खरीदी केंद्रों से समय पर धान उठाने की योजना पूरी तरह विफल हो गई है। प्रशासन ने 30 अप्रैल तक सभी 79 केंद्रों को खाली करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन आज भी केंद्रों में धान का अंबार लगा हुआ है। जमीनी हकीकत यह है कि करीब 1.44 लाख क्विंटल धान अभी भी उठाव के इंतजार में है। अब प्रशासन ने मिलर्स को 10 मई तक का नया अल्टीमेटम दिया है।
धान का उठाव नही होने से सबसे बड़ी परेशानी खरीदी प्रभारियों को हो रही है। मई की तपती गर्मी के कारण धान में सूखत (वजन की कमी) तेजी से बढ़ रही है। नियमों के मुताबिक अगर धान का वजन कम होता है तो उसकी भरपाई खरीदी प्रभारियों के वेतन से की जाती है। धान खरीदी प्रभारियों को डर है कि इस देरी की वजह से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। दूसरी ओर बस्तर में मौसम का मिजाज भी लगातार बदल रहा है। पिछले कुछ दिनों से हो रही बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने मुसीबत और बढ़ा दी है। खुले में रखे करोड़ों रुपए के धान के भीगने और खराब होने का खतरा अब वास्तविक लगने लगा है।
खरीदी केंद्रों के कर्मचारियों का कहना है कि वे हर साल इस समस्या से जूझते हैं, मिलर्स अपनी मनमर्जी से धान उठाते हैं। देरी होने पर जब धान सूखता है तो उसका वजन कम हो जाता है। सरकारी रिकॉर्ड में धान उतना ही रहता है, जितना खरीदा गया था। वजन कम होने पर प्रशासन प्रभारियों पर लापरवाही का आरोप लगाकर उनसे वसूली करता है। पिछले खरीफ सीजन में बस्तर जिले के किसानों से कुल 2,78,371 टन धान की खरीदी की गई थी। नियम के अनुसार, इस धान को 31 मार्च तक मिलर्स द्वारा उठा लिया जाना था। जब काम पूरा नहीं हुआ, तो समय सीमा बढ़ाकर 30 अप्रैल की गई। लेकिन यह डेडलाइन भी निकल गई। जिले के 50 से अधिक मिलर्स मैदान में हैं, फिर भी काम की रफ्तार बहुत धीमी है।
बस्तर जिले के फूड कंट्रोलर घनश्याम सिंह राठौर का कहना है कि मिलर्स को 10 मई तक का अंतिम समय दिया गया है। डीओ कटने के बाद देरी करने वाले मिलर्स पर पेनाल्टी लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अगर निर्धारित समय में उठाव पूरा नहीं हुआ तो कलेक्टर के निर्देश पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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