जन भागीदारी सबसे दूर, सबसे पहले अभियान जनजातीय क्षेत्रों के विकास में मील का पत्थर

रायपुर। भारत की आत्मा गांवों में बसती है, और उन गांवों की आत्मा जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपरा और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली में दिखाई देती है। सदियों से जल, जंगल और जमीन के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने वाला जनजातीय समाज आज देश के विकास के केंद्र में है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र को जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने जन भागीदारी सबसे दूर, सबसे पहले अभियान का शुभारंभ किया है। यह केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि उन आखिरी पंक्ति में खड़े लोगों तक विकास की रोशनी पहुंचाने का मानवीय प्रयास है, जिन्हें वर्षों तक मुख्यधारा से दूर माना गया।
जनजातीय गरिमा उत्सव के अंतर्गत 18 से 25 मई तक चलने वाला यह अभियान जनजातीय समाज के सम्मान, आत्मविश्वास और अधिकारों को नई शक्ति देने का माध्यम बनेगा। जब शासन स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनेगा, योजनाओं की जानकारी देगा और समाधान सुनिश्चित करेगा, तब लोकतंत्र की असली ताकत दिखाई देगी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा कहा है कि विकसित भारत का सपना तब तक अधूरा है, जब तक देश के जनजातीय अंचल विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ जाते। यही कारण है कि पीएम जनमन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, आदि कर्मयोगी अभियान और सर्वेसेतु ऐप जैसी योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ ने इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं जनजातीय समाज से आते हैं। इसलिए वे जनजातीय जीवन की पीड़ा, संघर्ष और संभावनाओं को बहुत करीब से समझते हैं। उनके नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि विकास केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि जंगलों और दूरस्थ बसाहटों तक समान रूप से पहुंचे। यही संवेदनशीलता इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है। विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा इस जनभागीदारी अभियान को उसके उद्देश्य तक पहुंचाने के लिए संकल्पित होकर कार्य करने में लगे हैं. प्रदेश के 1544 पीएम जनमन चयनित ग्रामों, 6691 धरती आबा ग्रामों और 7222 आदि सेवा केंद्रों के माध्यम से चलाया जा रहा यह अभियान प्रशासन और जनता के बीच विश्वास का नया पुल तैयार करेगा। स्वास्थ्य जागरूकता, जनसुनवाई, सेवा संतृप्ति और त्वरित शिकायत निराकरण जैसी गतिविधियां यह साबित करती हैं कि सरकार केवल योजनाएं बना नहीं रही, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध भी है।
आज आवश्यकता केवल विकास की नहीं, बल्कि सहभागी विकास की है। जब जनजातीय समाज स्वयं विकास यात्रा का भागीदार बनेगा, तभी आत्मनिर्भर और विकसित भारत की नींव मजबूत होगी। सबसे दूर, सबसे पहले का यह संदेश वास्तव में उस नए भारत की पहचान है, जहां कोई भी समाज, कोई भी गांव और कोई भी व्यक्ति विकास से वंचित नहीं रहेगा। छत्तीसगढ़ की धरती से शुरू हुआ यह अभियान आने वाले समय में जनजातीय उत्थान का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है। यह केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि जनजातीय सम्मान, सामाजिक न्याय और ऐसा उत्सव, जो विकसित भारत के सपनों को जन-जन की आकांक्षाओं से जोड़ता है।







