बस्तर के निजी विद्यालय आरटीई से प्रवेशित बच्चाें से वसूल रहे 35 हजार तक वार्षिक ट्यूशन फीस

जगदलपुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को समान और निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना है, लेकिन बस्तर जिले के जगदलपुर से सामने आएं मामले में एक निजी विद्यालय हम अकादमी पर आरटीई के तहत अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को कथित रूप से स्कूल बस लेने और 35 हजार वार्षिक ट्यूशन फीस जमा करने का दबाव बनाने तथा ऐसा नहीं करने पर छात्र को विद्यालय से निकालने की धमकी देने का आरोप लगा है। फीस नहीं जमा करने पर कई अध्ययनरत विद्यार्थियों को स्कूल से निकाल भी दिया गया है जो पढ़ाई से वंचित हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जगदलपुर निवासी महेन्द्र नाग और अरुण शर्मा ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी बस्तर को लिखित शिकायत सौंपकर बताया है कि उनके पुत्र एलेक्स नाग और यश शर्मा व् अंश शर्मा हम अकादमी स्कूल जगदलपुर में कक्षा 6वीं, 7वीं और 8वीं के छात्र हैं। जिनका प्रवेश आरटीई 12 (1) (सी) के तहत हुआ था और वह वर्तमान में इसी योजना के अंतर्गत अध्ययनरत हैं। लेकिन अब स्कूल प्रबंधन द्वारा दबाव बनाया जा रहा है कि बस और ट्यूशन नहीं लेने पर बच्चों को स्कूल से निकाल दिया जाएगा। ट्यूशन व बस लेने से मना किया तो मेरे बच्चे को स्कूल से निकाल दिया। अभिभावक इफदान गार्जन ने बताया कि उसका बेटा जोएल गार्जन आरटीई के तहत हम अकादमी स्कूल के सातवीं कक्षा में पढ़ रहा था। जिसे 35 हजार रुपए नहीं देने पर स्कूल से निकाल दिया गया।
बस्तर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी बलीराम बघेल ने बताया कि निजी विद्यालय हम अकादमी के बारे में शिकायत आई है। स्कूल के प्राचार्य को नोटिस भेजा जायेगा, जिसके बाद समुचित कार्यवाही की जायेगी।
महेन्द्र नाग द्वारा कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विद्यालय प्रबंधन लगातार परिवार पर विद्यालय की बस सेवा लेने और 35 हजार प्रतिवर्ष ट्यूशन फीस जमा करने का दबाव बना रहा है। शिकायत के अनुसार, प्रबंधन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि बस सुविधा नहीं ली गई और फीस जमा नहीं की गई तो छात्र को विद्यालय में नहीं रखा जाएगा। महेंद्र ने बताया कि उसका लड़का एक हफ्ते से स्कूल नहीं जा रहा है और पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा है बच्चे की पढ़ाई खराब हो रही है।
अरुण शर्मा नामक अभिभावक ने बताया कि हम अकादमी के संचालक ने उनसे कहा कि 1 बच्चे की सालाना फीस 30 हजार रुपए देने की हैसियत है, तो यहां पढाओं वरना ले जाओ। उसके दो बच्चे हम अकादमी स्कूल में आरटीई के माध्यम से पढ़ाई कर रहे थे, जो कानूनन बिल्कुल निःशुल्क है, लेकिन पिछले वर्ष से स्कूल प्रबंधन द्वारा पैसों की मांग की जा रही। जो हमारी आर्थिक स्थिति के हिसाब से कतई संभव नहीं है, इसका विरोध करने पर मेरे छोटे बेटे को स्कूल से निकाल दिया गया जबकि बड़े बेटे को काफी मिन्नतों बाद फिलहाल स्कूल में बैठने दिया जा रहा है, लेकिन पैसे के लिए बहुत दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर को की गई है। कई चक्कर लगाने के बाद भी आज पर्यंत तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अभिभावक अरुण ने जब स्कूल संचालक से मोबाइल पर कॉल कर अपने बच्चे को कक्षा में भेजने बाबत चर्चा की तो हम एकदमी संचालक श्री बरबटिया ने साफ तौर पर उनसे कहा कि आठवीं के बाद पढ़ाना है तो 20 हजार फीस देना होगा। हैसियत हो तो अपने बच्चे को पढ़ाओ वरना टीसी ले जाओ उन्होंने नियमों के तहत आठवीं के आगे निःशुल्क पढ़ाई करवाने से साफ इनकार कर दिया। वही डीईओ कार्यालय का निर्देश होने का हवाला देने पर उनके पास लिखित आदेश जारी करवाने की बात कही गई है।
उल्लेखनिय है कि आरटीई 12(1) (सी) योजना शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 भारतीय संसद द्वारा 4 अगस्त 2009 को पारित किया गया था और 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू हुआ। छत्तीसगढ़ में इस योजना का लाभ शैक्षणिक सत्र 2010-11 से दिया जा रहा है। पहले इस अधिनियम का लाभ केवल कक्षा 8वीं तक ही मिलता था, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2019 में संशोधन कर इसकी मान्यता बढ़ाकर कक्षा 12वीं तक कर दी। इसके बाद आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले छात्र चयनित निजी विद्यालयों में नर्सरी प्रथम कक्षा से लेकर 12वीं तक निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। आरटीई की धारा 12 (1) (सी) के तहत सभी गैर-अनुदान प्राप्त एवं गैर-अल्पसंख्यक निजी विद्यालयों में प्रारंभिक कक्षाओं की 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। इस योजना का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन और समान अवसर सुनिश्चित करना है, ताकि आर्थिक और सामाजिक आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त किया जा सके। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में अब तक लगभग 2.9 लाख छात्र इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।







