अक्ती पर पंचांग में मुहूर्त नहीं, फिर भी होंगे हजारों विवाह

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज भी अधिकतर शादियां सादिगीपूर्ण होती हैं। धीरे-धीरे दूसरों की देखा-देखी के कारण अधिक खर्च एवं तामझाम का अनुकरण शहरों के वाशिंदे छत्तीसगढ़ी भी कर रहे है। छत्तीसगढ़ में भिन्न-भिन्न पर्वों का अपना ही महत्व है। आशा और विश्वास बढ़ाने वाले पर्वों में अक्ती विशेष है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुतरा-पुतरी (गुड्डा-गुडिय़ा) का विवाह रचाने की परंपरा है। यह बिना पंचांग देखे शुभ कार्य हेतु महामुहूर्त माना जाता है और कल अक्ती पर्व पर पंचांग में शुभ मुहूर्त नहीं है लेकिन हजारों की संख्या में विवाह होंगे क्योंकि इस तिथि को अबूझ मुहूर्त की मान्यता है, इसलिए सभी मांगलिक कार्यक्रम करना शुभ होता है।
अक्ती (अक्षय तृतीया) छत्तीसगढ़ में वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाया जाने वाला प्रमुख कृषि पर्व है, जिसे अक्षय (अविनाशी) फल देने वाला माना जाता है। इस दिन किसान मिट्टी और बीजों की पूजा कर बुवाई की शुरुआत करते हैं। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में पुतरा-पुतरी (गुड्डा-गुडिय़ा) का विवाह रचाने की परंपरा है। यह बिना पंचांग देखे शुभ कार्य हेतु महामुहूर्त माना जाता है। अक्ती के दिन गांव-गाव में ही नहीं, भिन्न-भिन्न समाजों के महाधिवेशनों में आदर्श विवाह की धूम रहती है। अक्ती छत्तीसगढ़ में पुराने और नए के बीच का सेतु है और इसलिए इसे छत्तीसगढ़ का बैरागी भी कहा जाता है। वह सदा पुराने से नए, प्राचीन से अर्वाचीन, जड़ता से गतिशीलता की ओर चलता चला आया है। यही इसकी विशेषता है। छत्तीसगढ़ में पर्वों और कुछ विशेष तिथियों के भीतर की कथा का अपना ही महत्व है।
विवाह मुहूर्त इन तिथियों पर
अप्रैल : 20 , 21 , 26 , 29 ,30
मई : 5 , 6 , 7 , 8 , 10 को है। इसके बाद17 मई से 15 जून तक अधिकमास रहेगा। इस दौरान धार्मिक कार्यक्रम करना श्रेष्ठ माना गया है। वैवाहिक मुहूर्त नहीं है।
जून : 19 , 22 , 23 , 24 , 26 , 27 , 28 , 29
जुलाई : 1 , 3 , 4 , 6 , 7 , 8 , 9 को मुहूर्त है। 16 जुलाई से गुरु अस्त 10 अगस्त तक रहेंगे। इसलिए मुहूर्त नहीं बन रहा है।
25 जुलाई चौमासा
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चौमासा आरंभ होगा। इस दिन साधु संत एक स्थान पर जप, तप आराधना, कथा प्रवचन करेंगे। उनका पद विहार बंद हो जाता है। फिर 21 नवम्बर को देवउठनी एकादशी यानी तुलसी विवाह उत्सव के साथ मुहूर्त प्रारंभ होंगे। यानी कि नवम्बर में 21 , 24 , 25, 26 और दिसंबर में 2 , 3 , 4 , 5 , 11 , 12 को मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त है।






