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काकतीय महाविद्यालय प्रदेश का पहला कॉलेज बना जिसे ऑटोनॉमस का दर्जा मिला

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जगदलपुर। बस्तर अंचल के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लगभग 66 वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहा संभाग का सबसे बड़ा काकतीय महाविद्यालय धरमपुरा बस्तर संभाग का पहला स्वायत्त (ऑटोनॉमस) कॉलेज बन गया है। प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू होने के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मिली इस मान्यता ने न केवल काकतीय महाविद्यालय बल्कि पूरे बस्तर की उच्च शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। एनईपी 2020 लागू होने के बाद पीजी कॉलेज प्रदेश का पहला कॉलेज है जिसे ऑटोनॉमस का दर्जा मिला है।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही महाविद्यालय ने स्वायत्त संस्थान के रूप में अपने नए सफर की शुरुआत कर दी है। यह पहला अवसर है जब प्रवेश प्रक्रिया शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय के पोर्टल के बजाय महाविद्यालय के स्वयं के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। वर्ष 1960 में स्थापित काकतीय महाविद्यालय लंबे समय से बस्तर के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। वर्तमान में यहां करीब 2500 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और स्नातक से लेकर स्नातकोत्तर, विधि तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है।
स्वायत्तता मिलने के बाद महाविद्यालय में शोध गतिविधियों, नवाचार आधारित शिक्षा और राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलेगा। संस्थान का लक्ष्य भविष्य में ए ग्रेड प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान स्थापित करना है। फिलहाल कॉलेज के पास नैक की बी ग्रेडिंग है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऑटोनॉमस कॉलेज बनने से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग, रिसर्च प्रोजेक्ट्स और कौशल आधारित कार्यक्रमों के अवसर भी बढ़ेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और यूजीसी की मान्यता के बाद काकतीय महाविद्यालय का यह नया स्वरूप बस्तर के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, रोजगार और शोध के नए द्वार खोलने वाला साबित होगा।
प्राचार्य एवं अपर संचालक उच्च शिक्षा प्रो. अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि हम लंबे वक्त से काकतीय महाविद्यालय जगदलपुर को हमने ऑटोनॉमस बनाने के लिए प्रयासरत थे। बस्तर के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यह बड़ी उपलब्धि है। जगदलपुर के अलावा अब हम कांकेर और दंतेवाड़ा कॉलेज के लिए भी प्रयास कर रहे हैं। उम्मीद है कि दोनों कॉलेजों को भी मान्यता मिलेगी।

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