जल गंगा संरक्षण मिशन बना जन आंदोलन, मध्यप्रदेश में जल संरक्षण को नई गति

जल जीवन का आधार है और पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण एवं संवर्धन समाज का सर्वोच्च कर्तव्य है। इसी उद्देश्य के साथ शुरू किया गया ‘जल गंगा संरक्षण मिशन’ अब केवल एक सरकारी योजना न रहकर जनभागीदारी से जुड़ा एक व्यापक जन आंदोलन बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण और पुनर्जनन के क्षेत्र में देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जहां बड़े पैमाने पर जल संरचनाओं का निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया है। राज्य में ‘जल गंगा संरक्षण मिशन-2026’ के तहत निर्धारित हजारों परियोजनाओं में से बड़ी संख्या में कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष तेजी से प्रगति पर हैं। इस अभियान के लिए हजारों करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसका बड़ा हिस्सा अब तक उपयोग किया जा चुका है। ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में जल आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए कृषि तालाब, कुओं का पुनर्भरण, जल संरक्षण ढांचे और अमृत झीलों का निर्माण किया गया है, जिससे भूजल स्तर में सुधार और सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिली है। साथ ही शैक्षणिक और सामाजिक स्तर पर भी जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिससे यह अभियान एक व्यापक और प्रभावी जन आंदोलन का रूप ले चुका है।







