रुणिचा के बाबा रामसापीर की मनोहारी छवि के दर्शन से भक्त हुए धन्य

राजनांदगांव। 16 दिवसीय श्री नारायण महामहोत्सव में आराधना, भक्ति और आध्यात्मिक संगम के विविध रंगों की वर्षा निरंतर हो रही है। महोत्सव के दसवें दिवस पर सुगंधित केसर एवं लाल गुलाब की मालाओं से सुसज्जित राजस्थान के लोकदेवता, रुणिचा के लाल एवं अजमल घर अवतारी बाबा रामदेवजी महाराज का भव्य एवं अलौकिक दरबार सजाया गया। श्रद्धालुओं ने बाबा की ज्योत में आहुति अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की।
बाल कलाकार हार्दिक व्यास ने बाबा रामदेवजी के जन्म से लेकर उनके दिव्य जीवन चरित्र का भावपूर्ण वर्णन जम्मा शैली में प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने ऐसा भक्तिमय वातावरण निर्मित किया कि श्रद्धालु भक्ति रस में पूरी तरह सराबोर हो गए। कार्यक्रम के दौरान बाबा रामदेवजी की तीन आरतियां एवं अंत में भगवान श्री सत्यनारायण की महाआरती श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक रूप से की गई। कार्यक्रम के दौरान अचानक चली शीतल हवाओं और हुई हल्की वर्षा ने श्रद्धालुओं को विशेष आनंद का अनुभव कराया। भीषण गर्मी के इस दौर में मौसम के इस सुखद परिवर्तन को भक्तों ने भगवान की विशेष कृपा के रूप में अनुभव किया। वर्षा की फुहारों और ठंडी हवाओं ने पूरे वातावरण को और अधिक भक्तिमय एवं आनंदमय बना दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं प्रभु की कृपा से प्रकृति भी इस दिव्य आयोजन में सहभागी बन गई हो।
समिति के सचिव सौरभ खंडेलवाल एवं उत्सव प्रभारी लक्ष्मण लोहिया ने बताया कि अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है, दान, धर्म, सेवा, परोपकार एवं भगवान नारायण की भक्ति का विशेष अवसर है। श्री सत्यनारायण मंदिर परिसर में प्रवाहित हो रही भक्ति की यह धारा निरंतर विस्तार प्राप्त कर रही है और जनआस्था का विशाल संगम बनती जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रारंभ से अंत तक श्रद्धालुओं ने जय बाबा रामदेव के जयघोष से ऐसा वातावरण निर्मित किया कि मानो स्वयं बाबा रामदेव श्री नारायण धाम में पधार गए हों। भक्त भजन, आराधना और जयकारों में मग्न होकर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव करते रहे।







