18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद रायपुर में नवोदय तीर्थ वर्षायोग के लिए बड़ा मंदिर में मुनि आगम सागर महाराज ससंघ का हुआ प्रवेश
रायपुर। आज रायपुर की सड़कों पर धर्म की अविरल धारा बही! 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, दिगंबर मुनि परम पूज्य मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज ससंघ का नवोदय तीर्थ वर्षायोग 2026 हेतु श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में भव्य मंगल प्रवेश प्रात: 8 बजे हुआ।
श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर के मैनेजिंग ट्रस्टी एवं वर्षायोग 2026 के अध्यक्ष श्री नरेंद्र जैन गुरु कृपा एवं मंदिर कार्यकारणी के अध्यक्ष एवं वर्षायोग 2026 के कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय नायक जैन ने बताया कि आज सुबह मुनि संघ की भव्य मंगल आगवानी के लिए समस्त सकल दिगंबर जैन समाज बड़ा मंदिर ने भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया। जिसमें भक्तिमय वातावरण में बाजे गाजे से ,मार्ग में सुंदर रंगोली सजाकर,सर पर कलश लिए,धर्म ध्वजा लहराकर, जयकारों के बीच प.पु.मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज,मुनि 108 श्री पुनीत सागर जी महाराज, एलक 105 श्री धैर्य सागर जी महाराज,एकल 105 श्री स्वागत सागर जी महाराज ससंघ की आगवानी की गई। केसरिया रंग में रंगे समाज बंधुओं, जयकारों की गूँज और गुरुदेव के दिव्य दर्शन ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। आज का दृश्य वास्तव में अलौकिक था! श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड में आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री 108 पुनीत सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में श्रावकों को एकता और समय के सदुपयोग का महत्वपूर्ण संदेश दिया।
धर्म को केवल सुनना नहीं, जीवन में उतारना आवश्यक
मुनि 108 श्री आगम सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन सफल बनाने के सूत्र दिए। उन्होंने पारिवारिक अनुशासन और गुरु आज्ञा के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। अनुशासन और संस्कार बच्चों के साथ संबंधों पर चर्चा करते हुए मुनि श्री ने एक प्रेरक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक पिता ने अपने बच्चे को स्कूल में देरी से जाने पर दंडित किया। उन्होंने समझाया कि पिता का क्रोध वास्तव में बच्चे की भलाई के लिए था। मुनि श्री ने सलाह दी, परिवार को सुखी देखना चाहते हो तो हमेशा यश बॉस कहने की आदत डालो और बड़ों का कहना मानो। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वे स्वयं अपने गुरु के सामने विनम्रतापूर्वक नतमस्तक रहे और उनके आदेशों का पालन कर आज इस ऊँचाई पर पहुँचे हैं।
मुनि श्री ने पद्म पुराण से राजा ब्रजचंद्र का प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार एक अज्ञानी और क्रोधी राजा, जिसने कभी दिगंबर श्रमण को नहीं देखा था, उनके सानिध्य में एक बार में ही जैन धर्म का अनुयायी बन गया। मुनि श्री ने कहा, ‘वह राजा तो जैन धर्म से अपरिचित होकर भी एक बार में सब समझकर उत्कृष्ट श्रावक बन गया, लेकिन आप जैन धर्म में जन्म लेकर भी सब कुछ देखते हुए क्यों नहीं सुधर रहे? मुनि श्री ने प्रवचन की महत्ता बताते हुए कहा कि टेलीविजन पर प्रसारित प्रवचन केवल कुछ समय के लिए ही प्रभाव डालते हैं, लेकिन मुनि के वचन जन्म-जन्मांतर तक कल्याणकारी होते हैं। उन्होंने कहा, आगम के वचन भवसागर से पार लगाने वाले और आत्म-शांति की ओर ले जाने वाले हैं। हम आपके पास आए हैं, हमारा पूरा उपयोग कर लें । यदि आप इस अमूल्य अवसर का लाभ नहीं उठा पाए, तो यह जीवन की बड़ी चूक होगी।







