खैरागढ़ में प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल अवैध प्लाटिंग पर चुप्पी, छोटे दुकानदारों पर सख्ती

खैरागढ़ शहर में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर विरोधाभास सामने आया है, जहां एक ओर न्यायालय परिसर के सामने वर्षों से सड़क किनारे छोटे ठेले और खोमचे लगाकर रोजी-रोटी चला रहे लोगों को हटाने के लिए प्रशासनिक अमला सक्रिय दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर उसी परिसर के पास स्थित सरकारी नजूल भूमि पर हुई कथित अवैध प्लाटिंग और कब्जों पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। मामला एडवर्ड पार्क के सामने न्यायालय से लगी नजूल भूमि का है, जहां तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी की संयुक्त जांच में यह सामने आया कि नजूल प्लॉट नंबर 114 एवं 115, मूल खसरा नंबर 169 की लगभग 2.259 हेक्टेयर भूमि को बिना वैध अनुमति 22 टुकड़ों में विभाजित कर अलग-अलग लोगों को बेचा गया, जबकि यह भूमि “छोटे झाड़ का जंगल एवं घास भूमि” श्रेणी में दर्ज है और उस पर निजी उपयोग या प्लाटिंग की अनुमति नहीं है। जांच में यह भी पाया गया कि इस जमीन पर वर्तमान में 17 कब्जाधारी मौजूद हैं और कई स्थानों पर पक्के निर्माण भी हो चुके हैं, जबकि नगर और ग्राम निवेश विभाग ने इसे अवैध प्लाटिंग घोषित किया है। इसके बावजूद 29 सितंबर 2025 को कलेक्टर कार्यालय द्वारा नगर पालिका को कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के आठ महीने बाद भी न तो अवैध निर्माण हटाए गए हैं और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है, जिससे प्रशासन की निष्पक्षता और कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।







