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महंत कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रासंगिकता विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

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रायपुर। स्थानीय महंत लक्ष्मीनारायण दास कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की प्रासंगिकता विषय पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 14 एवं 15 मई 2026 को सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य नई शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा समकालीन शिक्षा व्यवस्था में उसके प्रभावों पर व्यापक विमर्श करना था।
कार्यशाला में भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत भारतीय शिक्षण मण्डल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रख्यात प्राध्यापक डॉ. अजय सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रासंगिकता पर अपना विस्तृत व्याख्यान देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और नैतिक मूल्यों को आधुनिक शिक्षा से जोडऩे का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह नीति विद्यार्थियों में रचनात्मकता, कौशल विकास, शोध प्रवृत्ति तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है। साथ ही उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा के मूल आधार से जोडऩे की आवश्यकता पर बल दिया।

महंत कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रासंगिकता विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न
उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल पाठ्यक्रम परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत को ज्ञान आधारित विश्वगुरु बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से भारतीय चिंतन, भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। वर्कशॉप में विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि किसी भी विषय की सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ प्रायोगिक जानकारी देना भी जरूरी है, उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कार चलाना सीखना हो तो क्लासरूम में बैठकर नहीं सिखा जा सकता उसके लिए मैदान में उतरना ही पड़ेगा। महाविद्यालय के प्राचार्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षकों को अपनी कक्षाओं में गुरुकुल शिक्षा पद्धति के संदर्भ जानकारी विद्यार्थियों को देने की सलाह दी।
विश्वविद्यालय के वाणिज्य विषय के डीन डॉ. शांतनु पॉल ने छत्तीसगढ़ के महाविद्यालयों विद्यार्थियों की उपस्थिति पर चिंता व्यक्त की, जिसका उत्तर देते हुए प्रोफेसर सिंह ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति पर आंतरिक के 10 अंक प्रदान करने का प्रावधान है, जिसे यहाँ भी लागू करने की सलाह दी।
कार्यशाला में महाविद्यालय के शिक्षण समिति के अध्यक्ष श्री अजय तिवारी, सचिव श्री अनिल तिवारी, प्राध्यापकगण एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा नीति से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद, विचार-विमर्श एवं प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किए गए। अंत में प्रोफेसर शांतनु पॉल ने आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की गई।

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