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बस्तर में अप्रैल महीने की गर्मी से इंद्रावती नदी सहित नदी-नालों का जलस्तर घटा

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जगदलपुर। बस्तर जिले में अप्रैल महीने में ही भीषण गर्मी का असर दिखाई देने लगा है। यहां का तापमान लगभग 38 डिग्री के आस-पास पहुंचने से इंद्रावती नदी समेत कई नदी-नालों का जलस्तर घट गया है। बस्तर के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात में भी पानी की एक-दो धार बह रही है। इसका असर न केवल पर्यटन पर दिख रहा है, बल्कि पर्यावरण और जनजीवन पर भी पडऩे लगा है। जहां आम दिनों में पर्यटकों की भीड़ रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। चित्रकोट इलाके के रामजीत बघेल कहते हैं कि जलप्रपात में पानी होने के कारण पर्यटन भी प्रभावित हुआ है, पर्यटन के कारण सैकड़ों लोगों की दाल-रोटी चलती थी, वह अब नही के बराबर हो चुकी है।
बस्तर की जीवनदायिनी कही जाने वाली इंद्रावती नदी का भी जलस्त्रोत कम हो रहा है। इसी नदी पर चित्रकोट वाटरफॉल बना है। अभी अप्रैल का महीना भी खत्म नहीं हुआ और पारा चढऩे लगा है। भीषण गर्मी की वजह से इंद्रावती नदी का पानी कम होने लगा है, जिससे एशिया का नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट जलप्रपात में भी एक पतली धार में पानी नीचे गिर रहा है। दंडकारण्य के घने जंगलों और गहरी नदी घाटियों से घिरे बस्तर के पठारी भूभाग में स्थित चित्रकोट जलप्रपात लंबे समय से मध्य भारत के सबसे प्रभावशाली प्राकृतिक दृश्यों में गिना जाता रहा है। लगभग 90 फीट ऊंची घोड़े की नाल जैसी अर्धवृत्ताकार चट्टान से गिरती जलधारा, मानसून के महीनों में कई सौ मीटर चौड़ी हो जाती है और दूर से देखने पर यह एक विशाल दूधिया परदे की तरह दिखाई देती है। यह जलप्रपात जिस इंद्रावती नदी पर स्थित है, वह पूर्वी घाट की पहाडिय़ों से निकलकर लगभग 535 किलोमीटर की यात्रा के बाद दक्षिण की ओर बहते हुए गोदावरी नदी में मिलती है।

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