युवाओं में असुरक्षा और बढ़ती नशे की प्रवृत्ति के कारण अवसाद के निरंतर मामले आ रहे सामने – डॉ सोनिया

रायपुर। रायपुर महंत लक्ष्मी नारायण दास महाविद्यालय में युवा पीढ़ी और अवसाद विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन हुआ। इस महत्वपूर्ण विषय में प्रख्यात मनोचिकित्सक डॉक्टर सोनिया परियल विशेषज्ञ वक्ता के रूप में शिरकत की, वहीं आयोजन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ देवाशीष मुखर्जी ,आइक्यूएसी सेल के डॉ प्रेमचंद्राकार डॉ शांतनु पाल सहित प्राध्यापकों की विशेष मौजूदगी रही महाविद्यालय के बच्चों में विषय को रेखांकित करने के लिए यह आयोजन किया गया था।
विशेषज्ञ वक्ता डॉ सोनिया परियल ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में युवाओं में अवसाद के मामले असुक्षा और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण सामने आ रहे हैं। उनका कहना था कि अवसाद की कई स्वरूप हो सकते हैं, इन स्वरूपों के चलते पीडि़त व्यक्ति में कई प्रकार की शारीरिक दुर्बलताएं सामने आती है जिन्हें काउंसलिंग और दवा के माध्यम से ठीक किया जाता है। डॉ परियल ने अवसाद से जुड़े कई रोचक प्रसंग को प्रस्तुत करते हुए जीवंत तरीके से इस बीमारी से निपटने के तरीके बताएं। उनका कहना था कि एक दौर था चर्चित अभिनेत्री दीपिका पादुकोण डिप्रेशन के शिकार हुई थी परन्तु अभिनेत्री ने मनोचिकित्सक की सहायता से अवसाद की बीमारी से लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की आज वह एक सफल अभिनेत्री के रूप में मौजूद हैं। परियल का मानना है की दुनिया के 90 प्रतिशत लोग किसी न किसी मानसिक अस्वस्थता के शिकार हैं। उन्होंने बताया कि मनुष्य का मस्तिष्क कंप्यूटर की तरह कार्य करता है जिसमें एक वक्त में परेशानी आ सकती है ऐसे में मनुष्य के सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को धैर्य, संयम प्रेम, सहायता और पारिवारिक सामांजस्य के माध्यम से अवसाद के मामलों से बचाया जा सकता है।

आत्महत्या के बढ़ते मामलों में ज्यादातर प्रकरण अवसाद के कारण सामने आते हैं इसलिए जरूरी है कि सामाजिक, आर्थिक शिक्षा गरीबी,भुखमरी इत्यादि मामलों मैं एक विशेष माहौल बनाकर सहयोग का वातावरण तैयार किया जाए तो अवसाद के मामले कम किया जा सकते हैं। वह बताती है कि चिकित्सा कार्य में कई बार अनुवांशिक वजह से भी अवसाद के मामले देखने को मिले इसलिए यह कहना कि किसी परिस्थिति के अवसाद के मामले सामने आते हैं। मनुष्य का न्यूरो सर्किट सही तरीके से कार्य करें तो अवसाद की तकलीफ से बचा जा सकता है। सेमिनार के विशेष विषय पर बोलते हुए कहा कि युवा रोजगार, रिजर्वेशन कंपटीशन एवं सामाजिक एकांत वातावरण के कारण तथा नशे के कारण और अवसाद के शिकार हो रहे हैं इनसे निपटने के लिए एक अच्छा दोस्त, अच्छी नींद, अच्छा फूड, अच्छा वातावरण, अच्छे रिश्ते एवं अच्छा व्यवहार आदि से बचाया जा सकता है तथा जिन्हें रोकने के लिए विशेष प्रयास की जरूरत है।
मनुष्य के विवेक में सहयोग और प्रेम मिल जाए तो अवसाद के मामलों को हटाया जा सकता है आयोजन के दौरान महाविद्यालय के प्रचार डॉ देवाशीष मुखर्जी ने भी विषय पर गंभीरता से विचार रखी और कहा वर्तमान दौर में सभी परिवारों में अवसाद के मामले दिख रहे हैं जो बेहद चुनौती पूर्ण है विशेष कर युवाओं में ज्यादा मामले आ रहे हैं इसे रेखांकित करते हुए यह आयोजन रखा गया था विश्वास है कि बच्चे लाभान्वित हुए होंगे आयोजन में संचालन डॉक्टर किरण अग्रवाल ने किया और आभार प्रदर्शन डॉक्टर प्रीतम दास द्वारा किया गया।






