राम मंदिर में 7 दिनी श्री मद्भागवत कथा आज से

रायपुर। श्रीराम मंदिर में सात दिनी श्रीमदभागवत कथा का आयोजन 6 से 12 अप्रैल तक किया जाएगा। इसके कथा वाचक हिमांशु कृष्ण भारद्वाज महाराज होंगे। कथा के साथ हिंदू समाज को संगठित और मजबूत बनाने के लिए गौ सेवा, समाज सेवा और सामाजिक विसंगतियाँ पर जागरूकता का संदेश भी देंगे। भागवत कथा के बाद प्रसादी की व्यवस्था भी रखी गई है। यह जानकारी आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील रामदास, राजेन्द्र, संयोजक कैलाश मुरारका, कोषाध्यक्ष संजय अग्रवाल ने दी। पहले दिन 6 अप्रैल को मातृ शक्ति द्वारा श्रीराम मंदिर से कलश यात्रा निकाली जाएगी। जो वीआईपी चौक से फेरी लगाकर कथा स्थल पहुंचेगी। सात दिनों तक चलने वाली कथा में प्रथम दिन भागवत के महात्म्य, धुंधुकारी की कथा और ज्ञान-वैराग्य का प्रसंग, जो कथा सुनने की पात्रता जगाता है।
दूसरा दिन सृष्टि की रचना, भगवान के अवतारों का वर्णन और ध्रुव-प्रहलाद जैसी अटूट भक्ति की कथाएं सुनाई जाएंगी। तीसरा दिन भगवान के विशेष अवतार पर केंद्रित होगा। चौथा दिन श्रीकृष्ण का दिव्य जन्म, गोकुल की लीलाएं और बाल लीलाओं का वर्णन होगा। पांचवां दिन गोवर्धन पूजा और रासलीला पर केंद्रित होगा। छठा दिन कंस वध और रुक्मिणी विवाह पर होगा। सातवां दिन सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति पर कथा होगी।
आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील रामदास, राजेन्द्र संयोजक कैलाश मुरारका और कोषाध्यक्ष संजय अग्रवाल ने बताया कि कथा के साथ हिन्दू समाज को संगठित और मजबूत बनाने के लिए गौ सेवा, समाज सेवा और सामाजिक विसंगतियों पर जागरूकता संदेश भी दिया जाएगा।
इसके आयोजकों में राम मंदिर के सचिव नंदन जैन, मनोज गोयल, सुनील अग्रवाल, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, गोविंद अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, शैलेष अग्रवाल, हर्षित सिंघानिया, पुष्पेंद्र उपाध्याय, पुरुषोतम सिंघानिया, श्रीराम शर्मा, विक्रम केवलानी, हेमंत करमेले रविंद्र सिंह, उमेश शुक्ला, डॉ. अनिल द्विवेदी, कलश यात्रा प्रभारी भारवी वैष्णव, अनामिका सिंह एवं निधिश्री शर्मा आदि शामिल हैं।
हिमांशु महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदपुर शहर के कस्बा खानपुर नामक स्थान में हुआ। 9 वर्ष की आयु में ही घर त्यागकर गुरुकुल आ गए और कठोर तपस्वी जीवन में शुक्ल यजुर्वेद, श्रीमदभागवत महापुराण और अन्य शास्त्रों का अध्ययन किया।
13 वर्ष की आयु में वेद स्वाध्याय प्रतिभा सम्मान में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत किए गए। कथा के माध्यम से भक्ति, ज्ञान और वैरागय का संदेश देते हैं। समाज को नैतिक और आध्यात्मिक जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। महाराज समाज सुधारक भी हैं। धर्म और संस्कृति के संरक्षण में लगे हुए हैं। युवाओं को संस्कार और नैतिकता की शिक्षा देते हैं तथा नशा, गलत आदतों और पाप कर्मों से दूर रहने की प्रेरणा देते हैं







