डोंगरगढ़ की पंचमी भेंट परंपरा, इतिहास और श्रद्धा का अद्भुत मेल

छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में इस बार नवरात्रि की पंचमी पर गोंड समाज की सदियों पुरानी परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। समाज के लोग बूढ़ादेव स्थल से भेंट यात्रा निकालते हुए माता बम्लेश्वरी मंदिर पहुंचे, जहाँ मंदिर को 601 किलो फलों से सजाया गया था और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। यात्रा में खैरागढ़ राजपरिवार से जुड़ी राजा की प्राचीन तलवार को लेकर पूजा अर्चना की गई। मंदिर में समाज के प्रतिनिधि किशोर नेताम और बैगा ने विधि-विधान से गर्भगृह में भेंट अर्पित की। प्रशासन की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, जिसमें पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा और एसडीएम एम. भार्गव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। गोंड महासभा के अध्यक्ष रमेश उइके के अनुसार, पंचमी भेंट की यह परंपरा समाज की आस्था और पहचान से जुड़ी हुई है और इसे आज भी श्रद्धा के साथ निभाया जाता है। इस आयोजन के पीछे भोसले काल से जुड़ी इतिहासिक कहानी भी है, जिसमें राजा घासीदास वैष्णव ने नागपुर को कर देने से इनकार किया था और बाद में टिकैत राय के आक्रमण के दौरान बंदी बना लिया गया था।





