हाईकोर्ट ने एसईसीएल टेंडर विवाद खारिज किया, नवनिर्मित मशीन की व्याख्या कंपनी पर छोड़ने का निर्णय

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एसईसीएल के टेंडर को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने कहा कि टेंडर की शर्तों की व्याख्या करने का अंतिम अधिकार उस विभाग या कंपनी के पास है जिसने टेंडर जारी किया है। मामला कोरबा क्षेत्र की बगदेवा भूमिगत खदान के नवनिर्मित स्वदेशी कंटीन्युअस माइनर मशीन के ट्रायल टेंडर से जुड़ा था। रायपुर की कंपनी मोश वरया ने सैंडविक मॉडल एमसी-350 मशीन का प्रस्ताव दिया, जिसे उन्होंने नवनिर्मित बताया, लेकिन एसईसीएल की टेक्निकल कमेटी ने इसे खारिज कर दिया क्योंकि वही मॉडल पहले हल्दीपला खदान में उपयोग हो चुका था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एसईसीएल ने नवनिर्मित शब्द की व्याख्या के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया, लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि विभाग ने प्री-बिड स्पष्टीकरण के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लिया और एआई का उपयोग केवल सामान्य जानकारी के लिए किया गया, जिससे निर्णय की वैधता प्रभावित नहीं हुई।







