चौपाल में फिल्म नजरिया का प्रदर्शन एवं विमर्श

रायपुर। फिल्म आर्ट एंड कल्चरल सोसाइटी (एफएसीटीएस) रायपुर के तत्वावधान में रचनाकर्मियों के साझा मंच चौपाल का लगातार आयोजन किया जाता है। इस बार चौपाल में भिलाई के युवा फिल्मकार आशुतोष ठाकुर द्वारा निर्मित एवं युवा रंगकर्मी चित्रांश श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित फिल्म नजरिया का प्रदर्शन किया गया।प्रदर्शन के पश्चात उपस्थित फिल्मकारों एवं दर्शकों ने निर्देशक के बीच फिल्म को लेकर सार्थक विमर्श हुआ जिसमें निर्देशक चित्रांश ने अपनी बात रखते हुए दर्शकों की जिज्ञासाओं के जवाब भी दिए।
नजरिया छत्तीसगढ़ी नाचा में एक प्रमुख किरदार के रूप में जाना जाता है । यह नाचा में, बीच बीच में और विभिन्न किरदार में पीतल का लोटा लेकर आता जाता रहता है। फिल्म का नायक गांव की नाचा पार्टी में कलाकार है जो इसी नजरिया की भूमिका करता है। हर कलाकार की तरह उसकी भी महत्वाकांक्षा गांव से निकलकर दिल्ली जैसे बड़े शहर में जाना। घर पर सिर्फ कमजोर पिता है,पत्नी उसके काम से नाराज़ होकर घर छोड़कर जा चुकी है। शहर जाने के लिए वह पैसे जमा करता रहता है । इस दरम्यान पारिवारिक, सामाजिक और व्यवहारिक दिक्कतों के बीच कई घटनाक्रम उसकी रोजमर्रा की जि़ंदगी को प्रभावित करते हैं। स्वाभाविक तौर पर इन घटनाक्रमों से वह लगातार अपने अंतर्द्वंद्व से गुजरता रहता है।
निर्देशक चित्रांश श्रीवास्तव की पैनी दृष्टि और सूक्ष्म अवलोकन की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने रोजमर्रा ग्रामीण जीवन के ये विभिन्न घटनाक्रम और आयाम बहुत सहज, सरल और संवेदनशीलता के साथ फिल्माए हैं।सीमित और संतुलित संवादों के साथ दृश्यों के फ्रेम और बिम्ब निर्देशक की रचनात्मक दृष्टि और नज़रिए का को सामने लाते हैं। फिल्म के दृश्यों के फिल्मांकन दर्शकों को बांधकर रख देते हैं और कुछ सोचने के लिए मजबूर करते हैं।
पूरी फिल्म पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गांव की पृष्ठभूमि पर फिल्माई गई है।फिल्म में नजरिया की भूमिका में अमित सिंह चौहान ने बेहतरीन अभिनय किया है। दलविंदर सैनी,आरती यादव और अन्य पात्रों ने भी अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय किया है । फिल्म में कॉस्ट्यूम , लोकेशन ,संगीत, ग्रामीण अंतर्संबंध से लेकर ज्यादातर संवाद भी ठेठ देसज हैं, जो कहीं भी बनावटी नहीं लगते। फिल्म दर्शकों को ग्रामीण जन-जीवन की परेशानियों से पूरी संवेदनशीलता के साथ परिचित कराती है। चित्रांश और उनकी पूरी युवा टीम छत्तीसगढ़ के फिल्मी परिदृश्य में नई बयार की तरह हैं जो कलात्मक फिल्मों की दुनियां में बड़ी उम्मीदें जगाते हैं। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में फिल्मप्रेमी और बुद्धिजीवी वर्ग के लोग उपस्थित थे।







