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मोर गांव-मोर पानी के तहत 436 आजीविका डबरियां के निर्माण का लक्ष्य, 255 की मिली स्वीकृति

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जगदलपुर । जिले में डबरी हरे गांव के सिंगार आथे समृद्धि मिलथे रोजगार यह महज एक नारा नहीं, बल्कि बस्तर के सुदूर वनांचलों में बदलती तस्वीर का गवाह है । जिला प्रशासन के महत्वाकांक्षी मोर गांव-मोर पानी महाभियान ने मनरेगा के तहत आजीविका डबरियों के निर्माण से ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली के नए रंग भरने शुरू कर दिए हैं । इस अभियान का मुख्य ध्येय जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत को जल संचय के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है । इसी उद्देश्य के साथ चालू वित्तीय वर्ष में कुल 436 डबरियों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 255 डबरियों को स्वीकृति भी मिल चुकी है । जहां कभी पानी की कमी से खेत सूख जाते थे और किसानों के चेहरे मुरझा जाते थे, वहां अब जल संरक्षण की यह पहल उम्मीद की नई किरण लेकर आई है। इन डबरियों से न केवल भू-जल स्तर सुधरेगा, बल्कि खेतों में हरियाली लौटने के साथ ही किसानों के घरों में समृद्धि भी आएगी।
इन डबरियों की खासियत इनका वैज्ञानिक और तकनीकी मानकों पर आधारित निर्माण है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी के अनुसार, प्रत्येक डबरी 20 मीटर लंबी, 20 मीटर चैड़ी और 3 मीटर गहरी बनाई जा रही है। निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और सही जगह के चुनाव के लिए जीआईएस और कार्ट एप जैसी आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, ताकि बारिश की एक-एक बूंद को सहेजा जा सके। पानी के सुचारू प्रवाह और गाद को रोकने के लिए इनमें इनलेट-आउटलेट सिस्टम और सिल्ट अरेस्टिंग चेंबर भी तैयार किए जा रहे हैं, जो इसे पारंपरिक तालाबों से अलग और अधिक उपयोगी बनाते हैं।
यह योजना केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का एक सशक्त माध्यम भी बन गई है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से ग्रामीणों को इन डबरियों से जुड़ी बहुउद्देशीय आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। विभाग के मैदानी अमला सहित स्वयंसेवी संगठनों के कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं और डबरी निर्माण के लिए आवश्यक दस्तावेजों व प्रक्रियाओं में उनकी मदद कर रहे हैं। किसानों को मत्स्यपालन, बतखपालन और डबरियों के मेड़ों पर उद्यानिकी फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए उन्हें मत्स्य, कृषि और पशुपालन विभाग से अनुदान और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। कुल मिलाकर मनरेगा के तहत बन रही ये आजीविका डबरियां बस्तर को एक हरे-भरे और खुशहाल भविष्य की ओर ले जाने वाला एक मजबूत कदम साबित हो रही हैं।

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