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राज्य स्तरीय हस्तशिल्प सम्मान हेतु कोंडागांव की दो महिला कलाकारों का हुआ चयन

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जगदलपुर। बस्तर की पहचान बन चुकी हस्तशिल्प परंपरा ने एक बार फिर जिले का नाम रोशन किया है। वर्ष 2024-25 के राज्य स्तरीय हस्तशिल्प सम्मान के लिए कोंडागांव की दो महिला कलाकार नगीना विश्वकर्मा और त्रिवेणी का चयन हुआ है। खास बात यह है कि इस बार पूरे प्रदेश से केवल 5 शिल्पियों को चुना गया, जिनमें दो नाम कोंडागांव से हैं, जो जिले के लिए गर्व की बात है। राज्य शासन द्वारा हर वर्ष बेलमेटल, लौह, मृदा, काष्ठ,पाषाण, भित्तिचित्र, पैरा और पेपरमैशे जैसी विधाओं में उत्कृष्ट कारीगरों को सम्मानित किया जाता है। चयनित शिल्पियों को 25 हजार रुपए, ताम्रपत्र और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाते हैं।
लौह हस्तशिल्प की कुशल कलाकार नगीना विश्वकर्मा की सफलता संघर्ष, समर्पण और पारिवारिक संस्कारों की मिसाल है। उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता तातीराम विश्वकर्मा से इस कला की बारीकियां सीखीं। बचपन से ही औजारों और धातु की दुनिया में पली-बढ़ीं नगीना ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी। पिता के मार्गदर्शन ने उन्हें आगे बढऩे की प्रेरणा दी और आज उसी कला के माध्यम से उन्होंने अपने पिता के सपनों को साकार कर सच्ची श्रद्धांजलि दी है। वहीं फरसगांव ब्लॉक की गडबा हस्तशिल्पी त्रिवेणी ने भी अपनी पारंपरिक कला को नए आयाम दिए हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और नवाचार से गडबा शिल्प को पहचान दिलाई है। दोनों महिलाओं की यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि अब महिलाएं भी हस्तशिल्प के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
सहायक प्रबंधक हस्तशिल्प रामधन खूंटे ने बताया कि कोंडागांव की पहचान देश-विदेश में यहां के शिल्प के कारण है । विदेशी पर्यटक भी यहां की कला को देखने आते हैं। अब बड़ी संख्या में महिलाएं इस क्षेत्र में दक्ष हो रही हैं, यही वजह है कि इस बार दो महिला कलाकारों का चयन हुआ है। यह उपलब्धि जिले के लिए गर्व और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।

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