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गिद्ध और उड़न गिलहरी की सफल रेस्क्यू ने दिखाई विभाग की संवेदनशीलता

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रायपुर। वन्यजीव संरक्षण से तात्पर्य पृथ्वी पर प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को बहाल करने, वन्यजीव प्रजातियों, उनके प्राकृतिक आवासों और जैव विविधता की सुरक्षा से है। यह आवास विनाश, अवैध शिकार और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से लड़कर प्रजातियों के अस्तित्व को सुनिश्चित करता है। भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम इसके लिए प्राथमिक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन्यजीव संरक्षण को केवल नीति तक सीमित न रखते हुए उसे जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू कर रही है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व और जंगल सफारी, नया रायपुर की टीमों द्वारा किए गए दो महत्वपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन इस प्रयास का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

गिद्ध और उड़न गिलहरी की सफल रेस्क्यू ने दिखाई विभाग की संवेदनशीलतागिद्ध और उड़न गिलहरी की सफल रेस्क्यू ने दिखाई विभाग की संवेदनशीलता
गौरतलब है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में महाराष्ट्र के ताडोबा क्षेत्र से भटका हुआ एक दुर्बल और निर्जलित गिद्ध जंगल में अचेत अवस्था में मिला। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे सुरक्षित पकड़कर प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद गिद्ध को जंगल सफारी रेस्क्यू सेंटर में ले जाकर विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों द्वारा उपचार और विशेष देखभाल प्रदान की गई। वर्तमान में गिद्ध स्वस्थ है और पुनः उड़ान भरने की स्थिति में पहुँच चुका है।

गिद्ध और उड़न गिलहरी की सफल रेस्क्यू ने दिखाई विभाग की संवेदनशीलता

इसी प्रकार, इंदागांव (बफर क्षेत्र) स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर की तारबंदी में एक दुर्लभ उड़न गिलहरी गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाई गई। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर उसे सुरक्षित मुक्त किया और उपचार हेतु जंगल सफारी रेस्क्यू सेंटर भेजा। संक्रमण-मुक्त उपचार के बाद उड़न गिलहरी अब पूर्णतः स्वस्थ है और उसे शीघ्र ही उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। इन दोनों घटनाओं ने यह सिद्ध किया है कि छत्तीसगढ़ वन विभाग सभी प्रजातियों चाहे वे प्रमुख (फ्लैगशिप) हों या कम जानी पहचानी सभी के संरक्षण के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध है।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने दोनों रेस्क्यू ऑपरेशनों की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार वन्यजीव संरक्षण को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी मानती है। गिद्ध और उड़न गिलहरी जैसे संवेदनशील एवं विरल प्रजातियों के सफल रेस्क्यू यह दर्शाते हैं कि वन विभाग की टीमें पूरी तत्परता, वैज्ञानिक पद्धति और मानवीय संवेदना के साथ कार्य कर रही हैं। यह संरक्षण केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं, बल्कि धरातल पर निरंतर जारी कार्रवाई का परिणाम है।
जैव विविधता:- प्रत्येक घटक की सुरक्षा महत्वपूर्ण
वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार की वन नीति जैव विविधता के प्रत्येक घटक की सुरक्षा पर आधारित है। विभाग का लक्ष्य वन्यजीवों का संरक्षण, उनके आवासों की सुरक्षा और मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है। उन्होंने कहा कि लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाना, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना है। वन विभाग क्षरा किए गए इन रेस्क्यू अभियानों ने यह संदेश स्पष्ट दिया है कि छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण केवल एक पहल नहीं, बल्कि संवेदना, सेवा और संवैधानिक दायित्व का संयोजन है।

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