हाईकोर्ट ने अमित को सुनाई आजीवन कारावास की सजा, 20 को सूको करेगा अमित की दोनों याचिकाओं पर सुनवाई

रायपुर। 23 वर्ष पुराने रामअवतार जग्गी हत्याकांड में सोमवार 6 अप्रैल का दिन अहम रहेगा। एक ओर जहां छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर ने अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तो उसी समय सर्वोच्च न्यायालय में अमित जोगी के वकील वैभव वालिया 2 अप्रैल को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा अमित जोगी को दोषी करार दिये जाने और तीन सप्ताह के भीतर कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के आदेश के खिलाफ याचिका दायर कर रहे थे। अमित जोगी को सजा सुनाये जाने की जानकारी मिलने पर उन्होने इसके खिलाफ भी याचिका दायर कर दी।सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों याचिकाओं को स्वीकार करते हुए इस पर एक साथ सुनवाई के लिये 20 अप्रैल की तारीख मुकर्रर की है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर जस्टिस माननीय रमेश सिन्हा और जस्टिस माननीय अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने इस 23 साल पुराने राम अवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री स्व.अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को दोषी करार देते हुए आत्मसमर्पण के लिये 3 सप्ताह की मोहलत देते हुए आदेश के लिये 6 अप्रैल की तारीख तय की थी। सोमवार सुबह याने आज जस्टिस माननीय रमेश सिन्हा और जस्टिस माननीय अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
पारित आदेश में कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दिए गए फैसले को रद्द करते हुए कहा कि, हत्याकांड में उपलब्ध सबूत अमित जोगी की संलिप्तता साबित करते हैं और उन्हें अन्य सह-आरोपियों की तरह सजा दी जानी चाहिए थी। अदालत ने सपाट तौर पर कहा है कि अमित जोगी इस हत्याकांड में साजिश रचने के दोषी हैं। यही आधार उन्हें दोषी ठहराने और उम्रकैद की सजा देने का प्रमुख आधार रहा। कोर्ट ने कहा कि जब सभी आरोपी एक ही अपराध में शामिल हों, तो किसी ऐक को विशेष कारण के बिना बरी नहीं किया जा सकता। आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि अमित जोगी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं । राम अवतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को हुई थी। यह मामला विशेष रूप से शुरुआत से ही राजनीतिक गलियारों के केंद्र में रहा। राम अवतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी न्याय के लिये पिछले 23 साल से लगातार न्यायालय में लड़ाई लड़ रहे हैं।
हाईकोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का समय नहीं देने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में अमित जोगी के वकील वैभव वालिया याचिका दायर कर रहे थे। उसी दरम्यान छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा फैसला सुनाए जाने की जानकारी मिलने पर उन्होने आदेश की कापी निकाल फैसले के खिलाफ याचिका दायर की जिस पर सुप्रीम कोर्ट 20 अप्रैल के एक साथ दोनों याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।







