बच्चों की प्रस्तुति दे गई संदेश- हर बात को जानने का होता है उचित समय

रायपुर। डायलॉग डिलीवरी अभिनय का वह हुनर है, जिसके जरिए रंगमंच का कलाकार अपनी भावनाओं और आवाज़ को उतार-चढ़ाव के साथ दर्शकों के सामने प्रस्तुत करता है। ऐसी ही रोचक संवाद अदायगी अगर बच्चे अपने नाटक उत्तर रामायण प्रसंग पर करने लगे, तो तालियां तो बजनी ही है। ऐसा ही नजारा रविवार की शाम महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में देखने को मिला। जब मंडल में चल रहे वाल्मिकी रामायण कथा के दौरान बाल कलाकारों ने अपर्णा कालेले के निर्देशन में उत्तर रामायण प्रसंग का मंचन किया गया।
नाट्य अभिनय के दौरान गुप्तचर की सूचना पर राम की प्रतिक्रिया, हनुमान की स्वामी भक्ति, राम से प्रश्न पूछने के लिए लव- कुश की जीजीविशा, माता सीता का दुखी भाव, उत्साह और जिज्ञासा बच्चों के चेहरे में देखने को मिली। उत्तर रामायण के इस प्रसंग में बाल कलाकारों ने यह संदेश प्रभावशाली तरीके से दिया कि हर बात को जानने का एक सही समय होता है। जिस तरह लव- कुश को अपनी सच्चाई उचित समय पर ही गुरु वाल्मिकी ने बताई और एक अनर्थ अपने आप ही टल गया।
नाटक में तनीष डोनगांवकर, तन्वी डोनगांवकर, प्रणीश डोनगांवकर, अनय पंडित, अक्षत पंडित, प्रथमेश पुराणिक, कियान महाजन, विहान कालेले, मायरा गुप्ते सहित अन्य बाल कलाकारों ने अपने सादगीभरे अभिनय से प्रभावित किया। नाटक में तकनीकी पक्ष परितोष डोनगांवकर और प्रवीण क्षीरसागर ने संभाला था। वेशभूषा अपर्णा कालेले और अजय पोतदार ने सेट डिजाइन बखूबी किया। पात्रों का परिचय प्रसन्न निमोणकर ने दिया।







