चाय बेचने वाले का बच्चा भी सीए बन सकता है

रायपुर। सीए का कोर्स टर्फ नहीं है क्योंकि यह कॉमर्स का टाईम और अगर कॉमर्स का बच्चा ग्रेजुएशन कर लेता है तो वह अपने साथ साथ अपने परिवार का भी भला कर सकता है। सीए का कोर्स न टर्फ और ना ही पैसे वाले लोग ही इसे पूरा कर सकते है, एक चाय बेचने वाले का बच्चा भी सीए बन सकता है क्योंकि 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए देश में सीए की मांग बहुत ज्यादा होगी। यह बातें वीकासा के चेयरमेन सीए राजेश अग्रवाल ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहीं। इस दौरान विजय, सिद्धार्थ, रायपुर चेयरमेन रश्मि वर्मा, सीआईसीएएसए के अध्यक्ष संस्कार अग्रवाल, पूर्व चेयरमेन रवि फत्लानी, सचिव ऋषिकेश यादव उपस्थित थे।
सीआईसीएएसए के अध्यक्ष संस्कार अग्रवाल ने बताया कि इस कार्यशाला का मकसद सीए कर रहे छात्र-छात्राओं को जागरुक करना था कि सीए बनकर वे क्या कर सकते है और सीए बनने के बाद वे देश के लिए अपनी क्या सेवा दे सकते है, अगर वह बच्चा सीए नहीं बन पता है तो वह अपने लाईफ में क्या कर सकता है। इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्यों से 1200 से अधिक बच्चे जो सीए की परीक्षा देने वाले है वे शामिल हुए और वे अपना – अपना शोध प्रस्तुत कर रहे है जिनका शोध सबसे अच्छा होगा उन्हें पुरुस्कृत भी किया जाएगा। राष्ट्रीय निर्माण में आईसीसी की क्या भूमिका है इस पर दो दिवसीय कार्यशाला में सीए के छात्र-छात्राओं को बारीकी से जानकारी दी गई। दस दौरान राष्ट्रीय सीए छात्र सम्मेलन में कुल 8 प्रेसीटेंशन अलग-अलग सत्रों में हुए।
वीकासा के चेयरमेन सीए राजेश अग्रवाल ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि सीए एक ऐसा कोर्स है जो सिर्फ 80 हजार रुपये में पूरा हो सकता है और यह कोर्स चार सालों का होता है इस दौरान बच्चों को सीए की पढ़ाई के साथ ही अलग-अलग एक्टिविटी भी सिखाया जाता है। यदि पैकेज की बात करें तो जो बच्चा यहां से पढ़ाई करता है उसे कम से कम 12 से 15 लाख रुपये का सालाना पैकेज मिलना तय है और वह थोड़ा मेहनत करता है तो उसे 25 से 30 लाख रुपये सालाना मिलना संभव हो जाता है। अगर मार्केट की बात करें तो जब तक इस देश में सीए नहीं रखेेंगे तब तक हम आयकर फाईल नहीं भर सकते है इसलिए पूरे देश में सीए की मांग बहुत ज्यादा है। पिछले साल 75000 बच्चों ने सीए का कोर्स पास किया जिनमें से 2000 से अधिक बच्चों की पहले ही जॉब लग गई और 8500 बच्चों का कैंपस में और कैंपस के बाहर लाखों बच्चों के लिए जॉब उनका इंतजार कर रहा था।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि कुछ लोग कहते है कि सीए का कोर्स टर्फ है मैं कहता है यह टर्फ नहीं है क्योंकि यह कॉमर्स का टाईम और कॉमर्स का बच्चा ग्रेजुएशन कर लेता है तो उसे 50 से 60 हजार रुपये महीना मिलना लगभग तय है। अगर सीए का कोर्स वह सही मायने में पूरा करता है तो वह आसानी से लाख – डेढ़ लाख रुपये कमाना शुरु कर देगा। सीए का कोर्स न टर्फ और ना ही पैसे वाले लोग ही इसे पूरा कर सकते है ऐसा नहीं है एक चाय बेचने वाले का बच्चा भी सीए बन सकता है और इसका उदाहरण भी आप लोगों के सामने कई बार आया है। जब वह सीए की पढ़ाई पूरा कर अपना तो जीवन संवारता ही है बल्कि अपने पूरे परिवार का भी जीवन का सहारा बन जाता है। यह इंस्टीट्यूट चालू हुआ था 1949 में जब देश का संविधान भी नहीं लिखा गया था। उस समय कहा जाता था कि जब तक सीए नहीं रखोंगे तब तक देश की गति और प्रगति नहीं हो सकती और आज हम देख रहे है कि पूरे देश में सीए की मांग बहुत ज्यादा है।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि यहां का पेपर एक भी बार लीक नहीं हुआ है और सबसे खास बात यह है कि इंस्टीट्यूट के चेयरमेन का बेटा 10 बार भी पेपर देने के बाद भी पास नहीं हो सका है। फेसबुक के मालिक ने किसी विदेशी नागरिक को अपना सीए नहीं बनाया है जबकि उनका सीए एक भारतीय है जिनके पास उनके पूरे इंकम की जानकारी है और वह बखूबी ईमानदारी से अपना काम कर रहा है। जीएसटी की लॉचिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि प्रधानमंत्री से ज्यादा अगर किसी के हस्ताक्षर की जरुरत है तो वह सीए की है। 2047 तक विकसित भारत बनकर रहेगा और इस दौरान सीए की मांग बहुत ज्यादा होगी इसलिए ज्यादा से ज्यादा सीए की पढ़ाई करें और अपना और अपने परिवार का भला करें।







