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तमनार में महिला आरक्षक के साथ क्रूरतापूर्वक मारपीट अक्ष्मय अपराध – बैज

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रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि तमनार में महिला आरक्षक से की गयी क्रूरतापूर्वक मारपीट और अभद्रता यह मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। इस घटना में महिला आरक्षक के साथ कुछ लोग मारपीट कर रहे है, उसके कपड़े फाड़े गये है और महिला आरक्षक हाथ जोड़कर गुहार लगा रही है कि उसको छोड़ा जाये और वह बड़ी मुश्किल से अपने अंगो को छुपाते हुये नजर आ रही है। यह वीडियो शर्मसार करने वाला झकझोर कर रख देने वाला यह वीडियो है। कांग्रेस इस पूरे घटना की कड़ी निंदा करती है तथा दोषी जो भी है उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिये। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाये, जो नजीर बने कभी कोई और किसी महिला के साथ ऐसा कृत्य करने का दुष्साहस नहीं कर पाये।
सवाल यह खड़ा होता है कि छत्तीसगढ़ में ऐसी स्थितिया निर्मित क्यों हो रही है? जनता में सरकार और पुलिस के प्रति इतनी ज्यादा आक्रोश क्यों बढ़ता जा रहा है? पुलिस के प्रति इतना आक्रोश दो साल के पहले कभी नहीं दिखा है। इसके पहले कवर्धा में भी सरकार और पुलिस के प्रति आक्रोश के कारण एक व्यक्ति को उसके घर में जिंदा जला दिया गया था। बलौदाबाजार में भी सरकार के प्रति आक्रोश के कारण एसपी, कलेक्टर कार्यालय को जला दिया गया था। एसपी और कलेक्टर को पिछले दरवाजे से भागकर अपनी जान बचानी पड़ी थी। बलरामपुर में जनता ने एसडीएम को मारने दौड़ा लिया था, उनको भाग कर जान बचानी पड़ी थी। पिछले पौने 2 साल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद सरकार के प्रति इतना ज्यादा अविश्वास और विद्रोह जनता में हो गया है जनता अपनी सीमाये पार कर रही है। यह सरकार के लिये आत्म मंथन करने का विषय है। किसी लोकतांत्रिक के सरकार के प्रति जनता का इतना आक्रोश कभी देखने को नहीं मिला है।
बैज ने कहा कि तमनार में आंदोलन 5 दिसंबर से चल रहा था। वहां पर 27 दिसंबर को ही ऐसी अप्रिय स्थिति क्यो निर्मित हुई? वहां पर तनाव के लिये सरकार जिला प्रशासन कलेक्टर और एसपी जिम्मेदारी तय होनी चाहिये। महिला आरक्षक के साथ हुई क्रूर घटना की न्यायिक जांच होनी चाहिये। आंदोलनकारी भी घटना में अपने लोगो की संलिप्तता से इंकार कर रहे है। घटना के लिये जो भी जिम्मेदार है उनके सामने लाया जाना चाहिये, जो आंदोलन एक पखवाड़े तक शांति पूर्ण था। वह इतना असभ्य और क्रूर कैसे हो सकता है। आंदोलन को बदनाम करने की साजिश तो नहीं है। इस दृष्टिकोण से भी जांच की जानी चाहिये।

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