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पवन खेड़ा के नाम पर मचे बखेड़ा और आंतरिक कलह ने कांग्रेस नेतृत्व के राजनीतिक खोखलेपन को किया उजागर

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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कांग्रेस द्वारा राज्यसभा प्रत्याशी के चयन की प्रक्रिया पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि पहले तो कांग्रेस का केन्द्रीय नेतृत्व पवन खेड़ा को ही प्रत्याशी बनाने की तैयारी में था लेकिन स्थानीय बनाम बाहरी के विवाद के कारण उपजी अफरा-तफरी में मचे बखेड़ा ने कांग्रेस नेतृत्व को अपना निर्णय बदलने को विवश किया। इससे यह सिद्ध हो गया है कि कांग्रेस में सिर-फुटौवल की स्थिति चरम पर है। ठाकुर ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने देखा कि किस तरह पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने दिल्ली तक जबरदस्त लॉबिंग की थी, बावजूद इसके बघेल और बैज के दिल के अरमाँ आँसुओं में बह गए।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए भूपेश बघेल ने गांधी परिवार की खुशामद में सड़कों पर गुलाब के फूल बिछाए थे, लेकिन आज वह गुलाब वाली भक्ति भी काम नहीं आई। बघेल और बैज पर फूलोदेवी नेताम की सोनिया-सेवा भारी पड़ गई है। कांग्रेस में योग्यता या छत्तीसगढ़ का हित पैमाना नहीं है, बल्कि गांधी परिवार की चापलूसी ही राज्यसभा की टिकट का इकलौता पैमाना है। इधर पवन खेड़ा के नाम पर जो बखेड़ा खड़ा हुआ, उसने कांग्रेस के भीतर चल रहे असंतोष और गुटबाजी को सरेआम कर दिया है। श्री ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के लिए छत्तीसगढ़ केवल एक एटीएम रहा है। जब भी प्रतिनिधित्व की बात आती है, तो यह पार्टी अपनों को किनारे कर बाहरी चेहरों या दरबारियों को प्राथमिकता देती रही है, परंतु इस बार कांग्रेस नेतृत्व की मंशा धरी-की-धरी रह गई। जाहिर है, कांग्रेस की यह अंतर्कलह आने वाले समय में एक नया राजनीतिक बखेड़ा खड़ा करेगी। ठाकुर ने कहा कि भाजपा हमेशा छत्तीसगढिय़ा अस्मिता और स्थानीय नेतृत्व का सम्मान करती है, जबकि कांग्रेस में टिकट का फैसला जनहित के बजाय ‘दरबारी लॉबिंगÓ से होता है।

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