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चमत्कारी जैन दादाबाड़ी में श्री जिनकुशल सूरि जी का 693 वाँ स्वर्गारोहण दिवस धूमधाम से मनाया गया

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रायपुर। खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणि प्रभ सूरीश्वर जी द्वारा प्रतिष्ठित श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व चमत्कारी श्री जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी , भैरव सोसायटी में 50 हजार नूतन जैन निर्माता दादागुरुदेव श्री जिनकुशल सूरि जी का 693 वाँ स्वर्गारोहण दिवस मंगलवार 17 फरवरी को श्रद्धाभाव से मनाया गया ।

चमत्कारी जैन दादाबाड़ी में श्री जिनकुशल सूरि जी का 693 वाँ स्वर्गारोहण दिवस धूमधाम से मनाया गया
श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व दादाबाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष बैद व महासचिव महेन्द्र कोचर ने बताया कि प्रातः से ही श्रद्धालु चमत्कारी जैन दादाबाड़ी में एकत्र होने लगे सभी ने मिलकर स्नात्र पूजन किया । 9 बजे से खरतरगच्छ महिला परिषद की सैकड़ों श्राविकाओं ने दादागुरुदेव का इक्तिसा संगीतमय जाप भक्तिभाव से किया । इक्तिसा जाप के बाद प्रकटप्रभावी , जैन समाज के अनन्य उपकारी दादागुरुदेव श्री जिनकुशल सूरि जी के स्वर्गारोहण दिवस प्रत्यर्थ दादागुरुदेव महापूजन व अष्टप्रकारी पूजा भक्तजनों ने सम्पन्न की । दादागुरुदेव महापूजन का प्रारम्भ नारियल अक्षत नैवैद्य के समर्पण मंत्र के साथ भक्तों ने प्रारम्भ कि , उपरोक्त जानकारी श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व दादाबाड़ी ट्रस्ट के महासचिव महेन्द्र कोचर व ट्रस्टी डॉ योगेश बंगानी ने देते हुए बताया कि सर्वप्रथम ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष बैद ने दादा श्री जिनकुशल सूरी जी के स्वर्गारोहण की पूजा में प्रगट प्रभावी दादा श्री जिनकुशल सूरी जी आज के ही दिन फाल्गुन वदी अमावस्या के दिन ही स्वर्गारोहण हुआ था तथा उसके 15 दिन पश्चात फाल्गुन सुदी पूनम को गुरु भक्त के 15 दिन के उपवास के पश्चात मालपुरा में प्रत्यक्ष दर्शन दादा श्री जिनकुशल सूरी जी ने दिए आज भी जो भी इनकी आराधना साधना करते है उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। इसके साथ ही उनके चमत्कारिक जन हितैषी उपकारों का वर्णन करते हुए प्रथम पूजा के जलाभिषेक विधान की पूजा गुरु पर तीख सुरतरु रूप सुगुरु सम दूजो तो नही दूजो तो नही के भाव पूर्ण बोलो से लाभार्थी परिवारों ने अभिषेक किया उसी तारतम्य में क्रमशः जल चंदन पुष्प धूप दीप अक्षत नैवेद्य व फल के समर्पण के 8 विधान सस्वर मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई फल पूजा का विधान फल पूजा से फल मिले प्रगटे नवे निधान के बोलो के साथ संपन्न हुई , नवा विधान वस्त्र पूजा का साध्वी श्री के मुखारविन्द से लक्ष्मी लीला पावे रे सुंदर जे गुरु वस्त्र चढ़ावे जे गुरु वस्त्र चढ़ावे के संगीतमय बोलो से प्रारम्भ हुआ।

चमत्कारी जैन दादाबाड़ी में श्री जिनकुशल सूरि जी का 693 वाँ स्वर्गारोहण दिवस धूमधाम से मनाया गया

वही सुप्रसिद्ध भजन गायक वर्धमान चोपड़ा ने, कैसे कैसे अवसर में गुरु राखी लाज हमारी मोको सबल भरोसो तेरो चंद्र सूरी पट्टधारी के समर्पण बोलो से गुरु से अरदास की कु दीप्ती बैद ने गुरु तेरे चरणों की धूल जो मिल जावे सच कहता हूं मेरी तगदीर बदल जाये दादा तेरे चरणों की के बोलो से सभी भक्तों के लिए गुरु का आशीर्वाद मांगा वही निर्मल पारख ने ,चांद से सुंदर मुखड़ा तेरा नयन के अमृत के प्याले वो तो कोई और नही है वो तो दादा मालपुरा वाले के बोलो से गुरु महिमा की बलिहारी ली दसवीं पूजा में चांदी की ध्वजा को महिलाओं ने सिर पर रखकर धूप दीप चवर के साथ दादा गुरु की छतरी की 3 फेरी देकर इन बोलो ध्वज पूजन कर हरख भरी- हरख भरी रे देवा हरख भरी रे के चौपाई के साथ शिखर पर ध्वजारोहण किया । स्वर्गारोहण महोत्सव के अवसर पर आज गुरुप्रसादी के लाभार्थी प्रकाशचंद , खेतमल , दिलीप , निर्मल पारख परिवार हैं ।

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