पंडरिया विधानसभा के ग्राम घोरपेन्द्री और बसनी में चेक डेम निर्माण में भ्रष्टाचार की आशंका, मनरेगा नियमों की अनदेखी का आरोप, इंजीनियर भी मूल्यांक से हटे पीछे

कवर्धा। पंडरिया विधानसभा व पंडरिया विकासखंड में बड़े पैमाने पर घटिया निर्माण व सरपंच की मनमानी सामने आई है यहां मनरेगा के कार्य को मजदूरों से कराना चाहिए था उसे जेसीबी मशीन से करवा दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, ताकि गांवों में जल संरक्षण, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा सके। लेकिन कई जगहों पर इन योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है ग्राम पंचायत क्षेत्र के ग्राम घोरपेन्द्री और उसके आश्रित ग्राम बसनी में, जहां चेक डेम निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार ग्राम घोरपेन्द्री और बसनी दोनों स्थानों पर लगभग 13-13 लाख रुपये की लागत से चेक डेम का निर्माण कराया जा रहा है। यह कार्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत स्वीकृत बताया जा रहा है। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य में पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा भारी अनियमितताएं की जा रही हैं और नियमों को खुलेआम दरकिनार किया जा रहा है।
जेसीबी से कार्य कार्य
ग्रामीणों के अनुसार मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य गांव के जरूरतमंद मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना होता है। इस योजना के तहत अधिकतर काम श्रम आधारित होने चाहिए, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीणों को रोजगार मिल सके। लेकिन घोरपेन्द्री और बसनी में चल रहे चेक डेम निर्माण कार्य में मजदूरों की जगह जेसीबी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। इससे जहां मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है, वहीं योजना के मूल उद्देश्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जेसीबी मशीन से तेजी से खुदाई और निर्माण कराया जा रहा है, जबकि कागजों में मजदूरों की उपस्थिति और भुगतान दिखाया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो यह मनरेगा नियमों का गंभीर उल्लंघन होगा और सरकारी धन के दुरुपयोग की संभावना भी बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इंजीयर ने कहा नहीं करूंगा मूल्यांकन
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक संबंधित इंजीनियर हीरेन्द्र वैष्णव ने भी इस कार्य से नाराज बताए जा रहे हैं। इंजीनियर ने साफ तौर पर कहा है कि यदि कार्य मनरेगा के नियमों के विपरीत कराया गया तो उसका मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। इंजीनियर की यह नाराजगी इस बात की ओर संकेत करती है कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा है।
सरपंच की मनमानी
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि पंचायत प्रतिनिधि द्वारा कार्य में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। न तो कार्य स्थल पर सही तरीके से सूचना पट्ट लगाया गया है और न ही मजदूरों की उपस्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी जा रही है। इससे लोगों में संदेह और भी बढ़ गया है कि कहीं विकास कार्यों की आड़ में बड़े पैमाने पर आर्थिक गड़बड़ी तो नहीं की जा रही। गांव में इस प्रकार घटिया निर्माण कर मनमानी बरती जा रही है। जिसके कारण इंजीयर स्वयं कार्य कराने से पीछे हट गए है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में इस निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाती है या नहीं। फिलहाल घोरपेन्द्री और बसनी गांव के लोग इस मामले में पारदर्शिता और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
वर्सन…
गांव में दो चेक डेम निर्माण के लिए मनरेगा से स्वीकृति मोली थी। सरपंच द्वारा जेसीबी से कार्य कराए जाने और अन्य शिकायत मिली थी जिसकी जांच चल रही है। इंजीयर मूल्यांकन नहीं करेंगे इसकी नस्ती मुझे नहीं मिली है।
अमित दुबे, सीईओ जनपद पंचायत पंडरिया







