मानवता की मिसाल बनीं आरपीएफ निरीक्षक तरुणा, हाईवे पर दुर्घटना में घायलों की मदद कर अस्पताल के साथ सामान भी पहुंचाया घर

राजनांदगांव। वर्दी की असली पहचान केवल कानून की रक्षा नहीं, बल्कि समय पर निभाई गई इंसानियत भी है। इसका उदाहरण ड्यूटी के दौरान नागपुर से वापसी के समय देवरी गांव के पास प्रस्तुत किया आरपीएफ पोस्ट राजनांदगांव की प्रभारी निरीक्षक तरुणा साहू ने। निरीक्षक तरुणा साहू नागपुर से लौट रही थीं। हाईवे पर देवरी गांव के पास उनकी गाड़ी एक भीषण सड़क दुर्घटना से आगे निकल गई थी। अफरा-तफरी, खून से लथपथ घायल और सहायता की पुकार सुनकर उन्होंने बिना समय गंवाए वाहन वापस मोड़ा और घटनास्थल पहुंचीं।
घटनास्थल पर पहुंचकर उन्होंने तुरंत घायलों की सहायता शुरू की। स्टाफ के साथ मिलकर हाईवे पर ट्रैफिक को नियंत्रित करवाया ताकि एंबुलेंस को आने-जाने में दिक्कत न हो। एंबुलेंस की व्यवस्था कर सभी घायलों को तत्काल देवरी अस्पताल पहुंचाया और चिकित्सकों से शीघ्र उपचार का अनुरोध किया। पता चलने पर कि दुर्घटनाग्रस्त परिवार राजनांदगांव का है, निरीक्षक साहू ने कर्तव्य को प्राथमिक सहायता तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने परिवार का पूरा सामान सुरक्षित अपनी गाड़ी से उनके घर तक पहुंचवाया और हर संभव सहयोग किया।
वर्तमान में कुछ घायल अभी भी उपचाराधीन हैं, जबकि अन्य को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। रेलवे सुरक्षा बल में अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के साथ-साथ पंडवानी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को देशभर में पहचान दिलाने वाली तरुणा साहू का यह मानवीय कार्य प्रेरणादायक है। संकट की घड़ी में दिखाई गई उनकी संवेदनशीलता ने यह सिद्ध कर दिया कि वर्दी मानवता और सेवा का भी प्रतीक है।





