बस्तर में ‘रोल मॉडल’ पर सियासी संग्राम हिडमा के महिमामंडन पर सांसद महेश कश्यप का विरोध

बस्तर में आदिवासी युवाओं के रोल मॉडल को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। बस्तर सांसद महेश कश्यप ने माओवादी विचारधारा के महिमामंडन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से माओवादी लीडर माड़वी हिडमा को युवाओं का आदर्श बताने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले “जल-जंगल-ज़मीन” के नाम पर आदिवासियों को भ्रमित किया गया और अब हिंसा को महिमामंडित किया जा रहा है।
दरअसल, जगदलपुर में भूमकाल स्मृति दिवस कार्यक्रम के दौरान हिडमा से जुड़ा गीत बजने के बाद विवाद शुरू हुआ, जिसके बाद यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि आदिवासी युवाओं का सच्चा रोल मॉडल कौन होना चाहिए। सांसद ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर में हजारों निर्दोष लोगों की जान गई और क्षेत्र का विकास बाधित हुआ। उन्होंने समाज से युवाओं को भटकाने वाले प्रयासों को रोकने की अपील की।
महेश कश्यप ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज के प्रेरणास्रोत स्वतंत्रता संग्राम के नायक हैं, न कि हिंसा के प्रतीक। उन्होंने गुंडाधुर, डेबरीधुर और झाड़ा सिरहा जैसे जननायकों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन्हीं के संघर्ष से आदिवासी अस्मिता और देश की आजादी को दिशा मिली। यह बहस अब केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा अहम सवाल बन गई है।







