छत्तीसगढ़ के सादगी अउ स्वाभिमान के प्रतीक पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी

पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी छत्तीसगढ़ के माटी ले जुड़े अइसने व्यक्तित्व रहिन जेन अपन सादा जीवन, गँवइहाँ स्वभाव अउ छत्तीसगढ़ी भासा प्रति अगाध प्रेम से पहिचान बनाएन। उँखर जनम 20 फरवरी 1926 ला जाँजगीर जिला के अकलतरा नजदीक कोटमीसोनार गाँव म होइस। बचपन ले ही तेज-तर्रार रहिन अउ कम उमर म पढ़ई म अव्वल आइन, भलेच कुछ बखत पढ़ई बीच म छूट गे रहिस। बाद म फिर ले पढ़ई सुरू करिन अउ मेट्रिक, बीए अउ एमए तक के पढ़ई पूरा करिन। साहित्य म रुझान के कारण कविता, कहानी, निबंध अउ लोककथा लिखे लगिन। उँखर रचना मन के प्रसारण नागपुर, भोपाल, रायपुर अउ बिलासपुर आकाशवाणी ले होइस, अउ दूरदर्शन म घलोक उँखर कृति देखाय गइन। पत्रकारिता म 1948 ले कदम रखिन अउ गाँव म रहिके ही पत्रकारिता करिन। 1957 म जनसंघ के टिकट ले चुनाव लड़िन, भलेच जीत नइ सकिन, फेर सादगी अउ ईमानदारी से जनसेवा करिन। कोटमी गाँव के सरपंच बनके विकास के कई काम कराइन जइसे दारू भट्टी बंद करवाना अउ रेलवे स्टेशन खुलवाना। छत्तीसगढ़ राज बने के बाद छत्तीसगढ़ी ला राजभाषा बनाय बर आंदोलन म सक्रिय रहिन अउ 28 नवंबर 2007 ला छत्तीसगढ़ी ला राजभाषा के दर्जा मिलिस, त उँखर समर्पण देखके सरकार उँखर ला छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के पहिली अध्यक्ष बनाइस। उँखर प्रमुख कृति मन म ‘रामबनवास’, ‘भोलवा भोलाराम’, ‘पर्रा भर लाई’ अउ ‘मेरे निबंध’ सामिल हें। उँखर पूरा जिनगी छत्तीसगढ़ी भासा, संस्कृति अउ माटी बर समर्पित रहिस, जेन से उँकर व्यक्तित्व छत्तीसगढ़ के आत्मा के सजीव रूप जइसने लगथे।







