जिस दिन जिस पात्र के संदर्भ में चर्चा, उस दिन उसी पात्र से संबंधित मनोरम झांकी भी

00 महाराष्ट्र मंडल में नवरात्र के आठ दिनों में रामायण के पात्रों पर चर्चा
रायपुर। हममें से लगभग सभी ने रामायण पढ़ी, सुनी और देखी। विभिन्न कथाओं और संतों के माध्यम से हम मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से जुड़ी रोचक कथाएं सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सुनते रहते हैं। ऐसी ही कुछ रोचक कथाएं इस बार हमें महाराष्ट्र मंडल में नवरात्र के आठ दिनों तक सुनने को मिलेंगी।
महाराष्ट्र मंडल प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष पर गुड़ी पाड़वा के साथ नवरात्र के आठ दिनों को रोचक व ज्ञानवर्धक बनाने जा रहा है। वहीं प्रतिदिन मंडल भवन में रामरक्षा स्त्रोकत और हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ भी किया जाएगा।आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि पहले यह आयोजन ऑनलाइन मोड पर किया जाना था, लेकिन लोगों की अत्यधिक सहभागिता और उत्साह को देखते हुए महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले व सचिव चेतन दंडवते ने अध्यक्ष कक्ष में आध्यात्मिक समिति के साथ महत्वपूर्ण बैठक लेकर इस आयोजन को महाराष्ट्र मंडल भवन में कराने का फैसला लिया है। यह आयोजन नवरात्र के आठ दिन यानी 30 मार्च से 6 अप्रैल तक प्रतिदिन शाम 5.30 से 6.30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रतिदिन चार- चार प्रतिभागी रामायण के विभिन्न पात्रों के संदर्भ में रोचक बातें साझा करेंगे।
आध्यात्मिक समिति के मार्गदर्शक चेतन गोविंद दंडवते के अनुसार आयोजन को लेकर प्रतिभागियों के पात्रों का नाम फाइनल कर दिया गया है। प्रतिदिन जिन चार पात्रों पर रोचक प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे, उसी के अनुरूप सुंदर आकर्षक झांकी भी तैयार की जाएंगी। झांकी में शामिल होने वाले कलाकारों के नाम भी लगभग फाइनल हो चुके हैं। इनमें अधिकांश प्रतिभागी बच्चे ही होंगे।
रामायण के विभिन्न पात्रों पर चर्चा करने वाले प्रतिभागियों के नाम:- डॉ. कमल वर्मा- कैकई, चारुशीला देव- लक्ष्मण, संध्या खंगन- राम रक्षा महत्व, मेघा कोतवालीवाले- शबरी, अर्चना भाकरे- जामवंत, अपर्णा मोघे- भरत, हेमंत मार्डीकर- शत्रुघ्न, वैशाली जोशी- उर्मिला, प्रसन्न निमोणकर- जटायु, मंजूषा वैशम्पायन- राजा दशरथ व रामायण का महत्व, डॉ. मंजरी बक्षी- बजरंग बली, आकांक्षा गद्रे- श्री राम, शुभांगी रुद्रजवार- सीता, शताब्दी पांडे- सुमित्रा, आरती ठोमरे- कौशल्या, रवि गहलोत- निषादराज, श्याम सुंदर खंगन- सुर्पनखा, गीता दलाल- राजा जनक, अर्चना मुकादम- मंथरा, कुमुद लाड – श्रुति कीर्ति, संगीता निमोणकर- सुलोचना, शुभांगी पंचघेरे- रावण, अरविंद जोशी- मेघनाथ, धनश्री पेंडसे- मंदोदरी, अपर्णा दभडग़ांव- कुंभकर्ण, रविन्द्र ठेंगड़ी- विभीषण, अर्चना धर्माधिकारी- अहिल्या, सुमिता रायजादा- गुरु विशिष्ठ, महर्षि विश्वमित्र, विभा पांडे- लव कुश, डॉ. वर्षा वरवंडकर- रामायण की प्रासंगिकता, परितोष- नल व नील।
