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शिक्षा के नाम पर पनप रहे व्यवसायीकरण, निजी स्कूलों के लूट तंत्र के खिलाफ एनएसयूआई ने सौंपा ज्ञापन

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जगदलपुर,। एनएसयूआई ने जिले में शिक्षा के नाम पर पनप रहे व्यवसायीकरण, निजी विद्यालयों की मनमानी फीस वसूली और नौनिहालों की सुरक्षा से हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए, एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य सिंह बिसेन के मार्गदर्शन एवं जिलाध्यक्ष विशाल खंबारी के नेतृत्व में आज जिला प्रशासन (कलेक्टर) को एक ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन के माध्यम से शिक्षा माफियाओं पर नकेल कसने और अभिभावकों को आर्थिक शोषण से बचाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में निजी विद्यालयों द्वारा पारदर्शिता को ताक पर रखकर ‘Amalgamated Fees’ और अन्य छुपे हुए शुल्कों के नाम पर अभिभावकों की जेब काटी जा रही है। शिक्षा के अधिकार और शुल्क विनियमन अधिनियमों का खुलेआम मखौल उड़ाया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन और चुनिंदा पुस्तक विक्रेताओं की सांठ-गांठ से एक सुनियोजित लूट चल रही है। जानबूझकर ऐसे विशिष्ट प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य की जा रही हैं, जो केवल स्कूल परिसर या किसी एक विशेष दुकान पर भारी कीमत पर मिलती हैं। हर साल किताबों का संस्करण बदलकर पुरानी किताबों को अनुपयोगी कर दिया जाता है, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की कमर टूट रही है।
परिवहन शुल्क के नाम पर मोटी रकम वसूलने के बावजूद सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। छोटे व्यावसायिक वाहनों और ऑटो में क्षमता से दोगुने बच्चों को बैठाया जा रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का सीधा उल्लंघन और बच्चों की जान के लिए गंभीर खतरा है। गली-मुहल्लों में बिना शासकीय पंजीयन और मानकों के प्ले स्कूल खुल गए हैं। इन केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानसिक विकास की कोई जिम्मेदारी तय नहीं है।
एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष विशाल खंबारी ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम” के तहत तत्काल जिला स्तरीय नियामक समिति सक्रिय की जाए और सभी स्कूलों की फीस संरचना का ऑडिट हो। विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य की जाएं और किसी विशेष दुकान से सामग्री खरीदने का दबाव बनाने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जाए। आरटीओ और यातायात पुलिस सघन जांच अभियान चलाकर असुरक्षित स्कूली वाहनों को तुरंत ज़ब्त करें। बिना मान्यता प्राप्त अवैध प्ले स्कूलों को सील कर उनके संचालकों पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष विशाल खंबारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन द्वारा इस गंभीर विषय पर शीघ्र और ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन छात्र और अभिभावक हित में एक वृहद, उग्र और चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। इस दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य सिंह बिसेन ने कहा कि बस्तर में शिक्षा के नाम पर चल रही इस संगठित लूट को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्कूलों को शिक्षा का मंदिर होना चाहिए, न कि अभिभावकों को निचोड़ने वाली एटीएम मशीन। किताबों के कमीशन और मनमानी फीस के इस माफिया राज के खिलाफ हमारा रुख स्पष्ट है। प्रशासन तत्काल प्रभाव से इन मुनाफाखोरों पर कड़ी कार्रवाई करे। यदि प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है, तो एनएसयूआई सड़कों पर उतरेगी, स्कूलों के ताले जड़ेगी और ईंट से ईंट बजा देगी। नौनिहालों के भविष्य और सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी स्कूल प्रबंधन को बख्शा नहीं जाएगा। इस दौरान प्रदेश सचिव शेख अय्याज, नुरेंद्र साहू, सौरभ जोशी, तन्मय चौहान, समीर कुमार, सुधीर उपस्थित रहे।

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